
इंदौर। आज एक महीने से जारी खरमास खत्म हो जाएगा और कल से शादियों के शुभ मुहूर्त शुरू होंगे, जिसके चलते शहरभर में बैंड-बाजा-बारात की धूम रहेगी। मगर सबसे बड़ी दिक्कत व्यवसायिक सिलेंडरों की आपूर्ति अभी भी नहीं सुधरने और संकट की कायम है। जिन परिवारों में शादियां हैं वे हैरान-परेशान हैं कि सिलेंडरों की जुगाड़ कैसे करें। हालांकि डीजल भट्टी और लकड़ी के चुल्हों सहित अन्य उपाय भी केटरर और हलवाइयों को अपनाना पड़ रहे हैं। ईरान, अमेरिका, इजराइल युद्ध के लम्बे खींचने के चलते सिलेंडरों के साथ-साथ अन्य सभी क्षेत्रों में कारोबारियों की परेशानी बढ़ गई है। यहां तक कि डामर भी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है, जिसके चलते सडक़ों के गड्ढे भरने के लिए निगम ने जो पेंचवर्क शुरू करवाया था वह भी फिलहाल ठप ही पड़ा है, क्योंकि जहां डामर की मात्रा कम मिल रही है, वहीं भाव भी अधिक बढ़ गए हैं।
पिछले मानसून के बाद से ही शहरभर की सडक़ें उखड़ी पड़ी हैं और कुछ ही सडक़ों पर पेंचवर्क हो पाया। पिछले दिनों नगर निगम के जनकार्य विभाग ने अलग-अलग फर्मों को पेंचवर्क के ठेके दिए और लगभग 14-15 करोड़ रुपए की राशि इस पर खर्च भी की जाना थी। कुछ ही जगह पेंचवर्क हुए और उसके बाद युद्ध के चलते डामर का भी टोटा पड़ गया। चूंकि क्रूड ऑइल के भाव भी बढ़े और साथ में आपूर्ति भी घट गई और पेट्रोल-डीजल सहित अन्य पदार्थ बनने के बाद ही क्रूड ऑइल से डामर भी प्राप्त होता है। सभी 85 वार्डों में ये पेंचवर्क अब तक हो जाना थे, मगर बीते डेढ़ महीने से चल रहे युद्ध के कारण डामर की आपूर्ति रूकी और कीमत भी बढ़ गई। चूंकि ठेकेदारों ने पुरानी कीमत के आधार पर ठेके लिए, अब उन्हें नुकसान होगा, जिसके चलते काम बंद कर दिया है। युद्ध के कारण सभी क्षेत्रों में असर पड़ा है और कारोबार में नुकसान हो रहा है, जिसमें कमर्शियल सिलेंडरों का टोटा भी एक बड़ा कारण है।
होटलों से लेकर कई उद्योगों में ये सिलेंडर लगते हैं, जिनकी आधी आपूर्ति भी मांग के मुताबिक नहीं हो पा रही है। होटल-रेस्टोरेंट एसोसिएशन मध्यप्रदेश के अध्यक्ष सुमित सूरी का कहना है कि मांग के मुताबिक कमर्शियल सिलेंडर अभी भी नहीं मिल रहे हैं, जिसके चलते शादियों से लेकर अन्य अवसरों पर होने वाले आयोजनों पर असर पड़ा है और मेन्यू कार्ड छोटा करने के साथ-साथ अन्य विकल्प भी इस्तेमाल करना पड़ रहे हैं, जिनमें लकड़ी, डीजल भट्टी, इंडक्शन चूल्हा सहित अन्य उपाय हैं। पीएनजी के कनेक्शन भी लिए जा रहे हैं। मगर उसके दाम भी पिछले दिनों बढ़ा दिए गए। रसोई गैस के सिलेंडरों की आपूर्ति अवश्य की जा रही है। हालांकि उसमें भी 25 दिन के बाद ही दूसरी बुकिंग का विकल्प दिया गया है और निम्र और गरीब तबके के लिए 5 किलो वाले सिलेंडर भी उपलब्ध कराए हैं। अभी महीनेभर से शुभ कार्यों, खासकर विवाह पर रोक लगी थी, मगर अब कल से शादियों की धूम शुरू हो जाएगी। वहीं 19 अप्रैल को आखातीज, जिस पर बिना मुहूर्त के शादी होती है, उस दिन शादियों के आयोजन शहरभर में होंगे, जिसके चलते केटरिंग, हलवाई सहित मैरिज गार्डन संचालक, होटल संचालकों से लेकर जिन परिवारों में शुभ विवाह हैं वे भी चिंतित हैं। मेहमानों की संख्या घटाने के साथ-साथ खाने के मेन्यू में भी कमी करने के सुझाव दिए जाने लगे हैं। कल के अलावा 20, 21, 26 से लेकर 29 अप्रैल को भी शादियों के अधिक मुहूत्र्त हैं, उसके बाद मई माह में भी 1 से लेकर 7, 8, और 14 मई तक मुहूत्र्त बताए जा रहे हैं। फिर 17 मई से अधिक मास लगने के चलते वैवाहिक आयोजनों का सिलसिला कम हो जाएगा।
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