
इंदौर। आवासीय भूखंडों पर व्यवसायिक निर्माण के मामले में अभी विधानसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में निगम ने स्वीकार किया था कि होटल और हॉस्टल सहित अन्य गतिविधियां महालक्ष्मी नगर सहित जुड़े हुए क्षेत्रों में चल रही है, जिसके चलते कल निगम ने सुबह से रात तक 16 होटलों को सील करने की बड़ी कार्रवाई तो की ही, वहीं कुल 64 ऐसे अवैध उपयोग परिवर्तन के मामले में नोटिस थमाए जिनमें बड़ी संख्या में होस्टल भी शामिल हैं, उनको भी सील करने की कार्रवाई निगम करेगा। उक्त कार्रवाई वीणा नगर, योजना 94, चिकित्सक नगर क्षेत्र में निगम की भवन अधिकारी टीना सिसोदिया ने करवाई। सुप्रीम कोर्ट ने भी आवासीय इलाकों में व्यवसायिक गतिविधियों को लेकर कड़े दिशा निर्देश अभी जारी किए हैं।
सभी राज्यों तथा केन्द्र शासित प्रदेशों को कहा है कि वे इस तरह की अवैध गतिविधियों को रोकें और सभी नगरीय निकाय सर्वे कर 15 मई तक इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट हलफनामे के साथ दाखिल भी करें। उक्त फैसला चेन्नई में रहवासी इलाके के व्यवसायिक उपयोग से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने किया, जिसके दायरे में पूरे देश को शामिल कर लिया है। दरअसल, इंदौर सहित सभी जगह आवासीय सम्पत्तियों के व्यावसायिक उपयोग के मामले निरंतर बढ़ते जा रहे हैं। इंदौर में ही हाउसिंग बोर्ड, प्राधिकरण सहित अन्य आवासीय भूखंडों पर 100 फीसदी व्यवसायिक निर्माण हो गए हैं, जिनमें शहर के प्रमुख हॉस्पिटल, होटलों से लेकर होस्टल सहित अन्य तरह के निर्माण शामिल हैं।
विधानसभा 5 में आने वाले महालक्ष्मी नगर, वीणा नगर, चिकित्सक नगर, योजना 94 सेक्टर-ई, बी में बड़ी संख्या में होटल, हॉस्टल और अन्य बिल्डिंगें आवासीय उपयोग पर निर्मित हो गई। विधायक महेन्द्र हार्डिया द्वारा पूछे गए सवाल के बाद निगम ने भी जानकारी दी, जिसमें कहा गया कि इन अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। नतीजतन कल भवन अधिकारी टीना सिसोदिया ने 16 होटलों को एक साथ सील करने की बड़ी कार्रवाई की। इस दौरान भवन निरीक्षक सचिन गेहलोत सहित भवन अनुज्ञा शाखा, राजस्व, रिमूवल विभाग के भी अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।
भवन अधिकारी के मुताबिक, कल जिन होटलों को सील किया गया उनमें होटल ग्रांड गिरधर, ऋषि इम्पेरियल, ईजी स्टे, कृष्णा पैलेस, गौरव, यूनिटी, ग्लोरी, कंचन, उत्सव, होटल केयर, पेरेडाइज, क्लासिक इन सहित हेड्स ऑफ बार रेस्टोरेंट भी शामिल है, वहीं इस क्षेत्र में 64 इस तरह की बिल्डिंगों को नोटिस भी जारी किए हैं, जिनमें होस्टल सहित अन्य गतिविधियां भी चल रही है, उन्हें भी इसी तरह बंद करवाया जाएगा। पूर्व में भी नगर निगम महालक्ष्मी नगर, तुलसी नगर, चिकित्सक नगर से लेकर महालक्ष्मी नगर मेनरोड पर जो अवैध व्यवसायिक बिल्डिंगें बनी हैं उन पर रिमूव्हल की कार्रवाई कर चुका है। बावजूद इसके धड़ल्ले से 100 फीसदी अवैध निर्माण हो रहा है। इस मामले में रहवासी संघों द्वारा भी लगातार निगम में शिकायतें दर्ज कराई जाती रही है, जिसके चलते विधायक ने विधानसभा में उक्त मामला उठाया, जिसमें सांईकृपा, राधिका पैलेस, वीणा नगर, तुलसी नगर, महालक्ष्मी नगर से लेकर पिपलिया कुमार, निपानिया क्षेत्र में बड़े पैमाने पर बनी होटलो, हॉस्टलों और अन्य व्यावसायिक बिल्डिंगों पर कार्रवाई की मांग की जाती रही है। इस मामले में अभी सुप्रीम कोर्ट ने भी कड़ा रुख अपनाया और देशभर में आवासीय सम्पत्तियों के अनाधिकृत व्यावसायिक उपयोग को लेकर ना सिर्फ कड़ी नाराजगी जाहिर की, बल्कि इसे रोकने के सख्त निर्देश केन्द्र शासित प्रदेशों के साथ सभी राज्यों को दिए, जिसमें नगर निगमों से कहा गया कि वे सर्वे करें और 15 मई तक इस तरह के अवैध व्यावसायिक उपयोग की विस्तृत रिपोर्ट हलफनामे के साथ दाखिल करें। इतना ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि रहवासियों के लिए ये बड़ी परेशानी और पर्यावरणीय के साथ-साथ उनके मूलभूत अधिकारों का भी उल्लंघन है, जिसमें व्यावसायिक इस्तेमाल अवैध तरीके से किया जाता है। इन अवैध गतिविधियों में प्रशासन और निगम अधिकारियों की भूमिका की जांच करने के भी आदेश दिए हैं।
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