
प्राधिकरण बोर्ड ने अपने ही संकल्पों को किया निरस्त…
इंदौर। प्राधिकरण (IDA) ने पिछले दिनों अपने अनबिके फ्लेटों (Unsold flats) को शासन (government) को देने का निर्णय लिया था, जिसे अब पलट दिया है। सरकारी जमीनों के एवज में प्राधिकरण योजना 136 में निर्मित हरसिंगार कॉम्प्लेक्स और अमलतास कॉम्प्लेक्स तथा गुलमोहर कॉम्प्लेक्स के 100 फ्लेटों को गाइडलाइन के आधार पर मूल्यांकन कर शासन को सौंप रहा था। इसका अनुमानित मूल्य लगभग 20 करोड़ रुपए आंका गया। मगर अभी बोर्ड बैठक में पूर्व में पारित संकल्पों को निरस्त करते हुए यह फैसला बदल दिया। अब प्राधिकरण इन फ्लेटों को विक्रय करने के साथ व्यवस्थापन में भी इस्तेमाल करेगा। दरअसल अभी एमआर-11 और एमआर-12 के निर्माण में बाधक परिवारों को शिफ्ट करने के लिए प्राधिकरण को फ्लेटों की जरूरत भी है। उसके मद्देनजर भी यह फैसला लेना पड़ा।
पिछले दिनों प्राधिकरण ने पूर्व में बेचे गए फ्लेटों के साथ ही हटाए जाने वाले परिवारों को शिफ्ट करने का भी निर्णय लिया था, जिसका फ्लेट खरीद चुके तमाम रहवासियों ने विरोध भी किया और बाद में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत इसकी मंजूरी भी नहीं मिल सकी। दूसरी इंदौर जहां संभागीय मुख्यालय तो है ही, वहीं पुलिस कमिश्ररी प्रणाली लागू होने के चलते कई अधिकारियों के लिए आवासों का टोटा पड़ रहा है। मेडिकल कॉलेज, एमओजी लाइन, डीआरपी लाइन और अन्य स्थानों पर बने पुराने और जर्जर सरकारी आवासों को तोड़ा भी गया और रेसीडेंसी तथा पलासिया क्षेत्र के पुराने आवासीय मकान भी जीर्ण-शीर्ण हो गए हैं। इसके चलते अफसरों के बोर्ड ने यह निर्णय लिया कि प्राधिकरण की विभिन्न योजनाओं में जो सरकारी जमीनें आबंटित की गई हैं उनके एवज में प्राधिकरण शासन को निर्मित फ्लेट भी दे देगा, जिसकी मूल्य की गणना कलेक्टर गाइडलाइन के आधार पर तय की गई। शासन को भी इस आशय का प्रस्ताव दो साल पहले भेजा गया था और उसके बाद बोर्ड संकल्प क्रमांक 236 और 189 के जरिए यह निर्णय लिया कि योजना 136 में हरसिंगार कॉम्प्लेक्स के 20, अमलतास कॉम्प्लेक्स के 70, गुलमोहर कॉम्प्लेक्स के 10, इस तरह कुल 100 खाली पड़े फ्लेटों को शासन को सौंप दिया जाए। हालांकि इन फ्लेटों के लिए शासन या स्थानीय विभागों से किसी तरह की मांग भी प्राधिकरण से नहीं की गई। परवारे ही इन फ्लेटों को सौंपने का निर्णय ले लिया। दूसरी तरफ कई योजनाओं में चल रहे विकास कार्यों में बाधक निर्माणों को हटाने और व्यवस्थापन के लिए आवास सुविधा उपलब्ध कराने के लिए भी फ्लेटों की जरूरत है और नगर निगम के पास भी प्रधानमंत्री आवास योजना में बनाए फ्लेट खाली नहीं बचे हैं, जिसके चलते अभी पिछले दिनों 15 मई को हुई प्राधिकरण बोर्ड बैठक में यह निर्णय लिया कि इन 100 फ्लेटों को अब शासन को नहीं सौंपा जाएगा, बल्कि इनका इस्तेमाल विक्रय करने के साथ व्यवस्थापन में होगा।
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