
न जनप्रतिनिधियों ने सवाल पूछे, न अफसरों ने जवाब दिए, आंकड़ों की रिपोर्ट देखी और खत्म हो गई बैठक
इन्दौर। जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (disha) की बैठक शनिवार को कलेक्टर सभागृह (Collector’s Conference Hall) में हुई, लेकिन सरकारी योजनाओं (Government schemes) की निगरानी और उनकी हकीकत जानने के लिए होने वाली यह बैठक महज खानापूर्ति बनकर रह गई। बैठक में आधे से ज्यादा विभागों के जिम्मेदार अधिकारी ही मौजूद नहीं थे। जो अधिकारी पहुंचे, उनमें भी ज्यादातर ने अपनी योजनाओं की प्रगति के आंकड़े प्रस्तुत किए और समीक्षा औपचारिकता में सिमट गई।
बैठक में नशामुक्ति अभियान, पीएमश्री स्कूल, रोजगार-कौशल विकास और विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रगति पर चर्चा हुई। अधिकारियों ने योजनाओं की उपलब्धियां और आंकड़े बताए, लेकिन सबसे अहम सवालों पर चर्चा नजर नहीं आई। कितने पात्र हितग्राही अभी भी योजनाओं से वंचित हैं, कितने आवेदन लंबित हैं योजनाओं का लाभ वास्तव में लोगों तक पहुंच रहा है या नहीं इन सवालों पर न तो जनप्रतिनिधियों की ओर से न सवाल हुए और न अधिकारियों से जवाबदेही के साथ जवाब मांगे गए। बैठक में एक भी विधायक नहीं पहुंचा ना ही एमआईसी के सदस्यों ने कोई सवाल ही खड़े करें। नशामुक्ति को लेकर सांसद शंकर लालवानी की अध्यक्षता में समीक्षा की गई। उन्होंने नशामुक्ति अभियान को और अधिक प्रभावशाली तरीके से चलाने के निर्देश दिए।
रिपोर्ट देखी, आंकड़े सुने और बैठक खत्म
दिशा समिति का उद्देश्य सिर्फ विभागीय रिपोर्ट सुनना नहीं, बल्कि योजनाओं की कमियां सामने लाकर उनका समाधान करना है। इसके बावजूद बैठक में जमीनी समस्याओं और योजनाओं के वास्तविक असर पर मंथन चर्चा नहीं हुआ। कई विभागों के जिम्मेदारों की गैरमौजूदगी ने भी सवाल खड़े किए। बैठक में मौजूद जनप्रतिनिधियों से उम्मीद थी कि वे अपने क्षेत्रों की समस्याओं और हितग्राहियों की शिकायतें सामने रखेंगे, वहीं अधिकारियों से अपेक्षा थी कि वे उपलब्धियों के साथ लंबित प्रकरण और योजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही बाधाएं भी बताएंगे, लेकिन बैठक में यह जवाबदेही दिखाई नहीं दी।
सांसद लालवानी ने दिखाई नाराजगी
बैठक के अंत में सांसद शंकर लालवानी ने अधिकारियों को योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने और विकास कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने नाराज होते हुए कहा कि यदि वास्तविक धरातल पर जाकर काम नहीं होगा तो योजनाओं की वास्तविकता का पता भी कैसे चलेगा। जनप्रतिनिधि भी अपने-अपने क्षेत्र में जाकर आम जनता से वास्तविक स्थिति पता करें। कुल मिलाकर पूरी बैठक कागजी खानापूर्ति नजर आई।
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