
इंदौर । उज्जैन के बडऩगर में 2 साल के मासूम की बोरवेल में गिरने से मौत के बाद इंदौर जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया है। जिले में चिन्हित 274 बोरवेलों की सुरक्षा जांच के आदेश जारी किए गए हैं। सभी अनुविभागीय अधिकारियों (एसडीएम) से कहा गया है कि वे अपने क्षेत्र में मौजूद बोरवेलों का स्वयं फिजिकल निरीक्षण करें और लिखित रिपोर्ट सौंपें।
गर्मी का मौसम शुरू होते ही खेत में लगे बोरवेल सूखने की कगार पर आ जाते हैं, वहीं खुले मैदान में भी इस तरह के उपक्रम देखे गए हैं, जहां खेल के दौरान बच्चों के गिरने की घटनाएं सामने आती हैं। उज्जैन की घटना से सबक लेते हुए कलेक्टर शिवम वर्मा ने सभी अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने साफ कहा है कि सिर्फ कागजी कार्रवाई नहीं चलेगी। अधिकारियों को मौके पर जाकर देखना होगा कि बोरवेल खुले तो नहीं हैं। सही तरीके से बंद किए गए हैं या नहीं और वहां किसी तरह का खतरा तो मौजूद नहीं है। जांच के बाद यह प्रमाण पत्र देना होगा कि क्षेत्र के सभी बोरवेल सुरक्षित हैं।
हादसा हुआ तो अफसर जिम्मेदार
निर्देशों में कहा गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों, खेतों, निर्माण स्थलों और खाली प्लॉटों में विशेष जांच की जाए। ऐसे स्थानों पर कई बार पुराने या सूखे बोरवेल खुले छोड़ दिए जाते हैं, जो बच्चों और राहगीरों के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं। प्रशासन ने सख्त चेतावनी भी दी है कि यदि इंदौर में खुले बोरवेल के कारण कोई हादसा हुआ तो संबंधित क्षेत्र के अधिकारी जिम्मेदार माने जाएंगे। ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बडऩगर हादसे ने झकझोरा
उज्जैन जिले के बडऩगर क्षेत्र में 2 साल का बच्चा खुले बोरवेल में गिर गया था। लंबे रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद उसे बाहर निकाला गया, लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी। इस घटना के बाद पूरे प्रदेश में प्रशासन हरकत में आया है। जनता से भी अपील की जा रही है। इंदौर प्रशासन ने नागरिकों से कहा है कि यदि कहीं खुला या असुरक्षित बोरवेल दिखे तो तुरंत प्रशासन को सूचना दें, ताकि समय रहते उसे बंद कराया जा सके।
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