
आंगनवाड़ी संचालिका मंत्री के सामने बोली
इन्दौर। भाई साब (Brother) बच्चों (hildren) का जो खाना (meals) आता है, उसमें कई बार कंकड़ निकलते हैं। बच्चे हमसे शिकायत करते हैं, हम करें तो क्या करें? वहीं, कई बार तो भवन का किराया भी 2 से 3 माह में आता है। हमें अपनी जेब से किराया देना पड़ता है। सैलरी भी इतनी नहीं है कि हम दूसरे खर्च भी वहन कर सके।
ये शिकायत आंगनवाड़ी संचालक और सहायिकाओं ने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय (Minister Kailash Vijayvargiya) के सामने कही। कल विजयवर्गीय ने अपने क्षेत्र की 200 आंगनवाडिय़ों में बच्चों को बैठने के लिए 80 लाख के फर्नीचर प्रदान किए। विधायक कार्यालय में हुए एक कार्यक्रम के दौरान क्षेत्र क्रमांक 1 में होने वाले 18 बोरिंग का भूमिपूजन भी किया गया। आंगनवाड़ी संचालित करने वाली महिलाओं से जब पूछा गया कि उनके यहां कोई समस्या तो नहीं है। इस पर कुछ संचालिकाओं ने एकसाथ यह कह दिया कि बच्चों को जो खाना आता है, उसमें कई बार कंकड़ निकलते हैं और बच्चे हमसे शिकायत करते हैं, वहीं गर्भवती महिलाओं के लिए जो पोषण आहार आता है, वह एक जैसा आता है। अगर यह आहार बदल-बदलकर दिया जाए तो महिलाओं को भी खाने में स्वाद आएगा और वह ठीक लगेगा। इस दौरान महिला एवं बाल विकास विभाग की परियोजना अधिकारी पल्लवी बिलोटिया और इंदू शर्मा भी मौजूद रहीं। शर्मा ने कहा कि देवास के प्लांट से खाना आता है, वे इस संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों को जानकारी देंगी। संचालिकाओं ने कहा कि अधिकांश आंगलवाड़ी किराये के भवन में संचालित की जा रही है, जिसका किराया भी 2 से 3 महीने में आता है, तब तक हमें किराया देना होता है, वहीं आयोजनों में जाने या मीटिंग में जाने के लिए भी हमें अपनी जेेब से भुगतान करना पड़ता है, जबकि सैलरी सीमित है। विजयवर्गीय ने महिलाओं से कहा कि आप चिंता न करें, मैं इस विभाग की मंत्री से बात करूंगा और समस्या हल करवाऊंगा। विजयवर्गीय ने संचालिकाओं से कहा कि आप के ऊपर एक महत्वपूर्ण जवाबदारी है। आप अपने यहां आने वाले बच्चों में संस्कार डालने का काम करेंं। बच्चे भगवान समान होते हैं और इनकी सेवा करने से आपको पुण्य मिलेगा। इस अवसर पर पार्षद शिवम यादव, सीमा डाबी, सूरज कैरो, निरंजन सिंह चौहान, वरिष्ठ भाजपा नेता अशोक चौहान, हरिनारायण यादव के अलावा बड़ी संख्या में भाजपा पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं स्थानीय निवासी शामिल थे।
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