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इंदौर में पोहे की दीवानगी, रोजाना 90 टन की खपत

June 06, 2026

कल अंतरराष्ट्रीय पोहा दिवस …पूरे देश में चलता है इंदौर का पोहा

 अलसुबह से देर रात तक रहती हैं दुकानें खुली,  शहरभर में 5000 से अधिक छोटी-बड़ी दुकानें

इन्दौर। कल 7 जून (June 7) को विश्व पोहा दिवस (World Poha Day) है। इंदौरी पोहे (Indori Poha) की ब्रांडिंग के लिए पोहा-डे मनाया जाता है। इंदौर में अलसुबह से लेकर देर रात तक 90 टन (90 tonnes) पोहे की खपत होती है। प्रत्येक रविवार को पोहे की खपत बढ़ जाती है।


  • उल्लेखनीय है कि पोहा पौष्टिक और लाइट नाश्ता है। यह दिन की शुरुआत के लिए परफेक्ट माना जाता है। पोहा दिवस पर लोगों को पिज्जा, बर्गर, मोमोज जैसे जहरीले खानपान के बजाय अपने नाश्ते में पोहे को शामिल करने का अनुरोध किया जाता है। दरअसल इंदौर सहित पूरे मालवांचल में कई दशकों से पोहा सुबह का सबसे चर्चित नाश्ता रहा है। इतना ही नहीं, पोहे के जायके के कारण अब इंदौर का नाम पूरी दुनिया में है। इंदौर में पोहे की करीब 5000 से ज्यादा दुकानें हैं। पोहा इंदौर, उज्जैन और मालवा में ही नहीं, बल्कि पूरे भारत के साथ अमेरिका, जापान, कनाडा जैसे देशों में भी खाया जा रहा है। इतना ही नहीं, देश के विभिन्न इलाकों में इंदौर के नाम से पोहा परोसा जा रहा है। यह इंदौर के लिए गौरव की बात है। इंदौर में वर्ष 1949 में प्रशांत के पोहे की पहली दुकान अन्ना जोशी ने शुरू की थी। वे महाराष्ट्र से पढ़ाई के लिए अपनी बुआ के यहां आए थे। पढ़ाई खत्म करने के बाद उन्होंने बुआ से एक हजार रुपए लेकर यह दुकान शुरू की। उस समय इंदौर में मिलों का दौर था। अन्ना जोशी ने सोचा कि श्रमिकों को सुबह जल्दी नाश्ता मिलना चाहिए। यह दुकान जेल रोड और राजबाडा पर थीं।

    सुबह के नाश्ते की पोहे से शुरुआत
    उज्जैन में तैयार होने वाला पोहा इंदौर में इस कदर लोकप्रिय है कि यहां रोज 90 टन पोहा शहर की करीब 5000 से ज्यादा नाश्ते की दुकानों और होटल पर बिक जाता है। शहर में रहने वाले अधिकांश युवा तो एक समय जमकर पोहे ही खाते हैं। यह झटपट बनकर तैयार हो जाता है, स्वास्थ्यवर्धक होता है और सस्ता भी पड़ता है।

    ऐसे हुई उसल-पोहे की शुरुआत
    जब इंदौर में कपड़ा मिलें चला करती थीं, तब वहां काम करने वाले लोग लंच के लिए उसल पैक करवाकर ले जाया करते थे और रोटी के साथ खाते थे। मजदूरों की डिमांड थी कि उसल को तीखा और झन्नाटेदार बनाया जाए। तब से उसल का स्वाद फैमस हो गया और लोग पसंद करने लगे। राजस्थान से आए लोगों ने उसल की शुरुआत की। मजदूर वर्ग आज भी तीखे उसल पोहे का दीवाना है।

    यहां हैं इंदौर के प्रसिद्ध पोहे के ठीए
    शहर में कुछ दुकानें तो ऐसी हैं, जो पोहे का ब्रांड बन चुकी हैं, जहां लोग बड़ी मात्रा में प्रतिदिन पोहा खाते हैं। राजबाड़ा, छप्पन दुकान, आनंद बाजार, मल्हारगंज, जेल रोड, गोराकुंड, मालगंज, बड़ा गणपति, मालवा मिल, पाटनीपुरा, एलआईजी, एमआईजी, महू नाका में पोहे की वर्षों पुरानी प्रसिद्ध दुकानें हैं।

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