तेहरान। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर ईरान ने बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति ने होर्मुज जलडमरूमध्य और फारस की खाड़ी की सुरक्षा एवं सतत विकास से जुड़े एक विधेयक की सामान्य रूपरेखा को मंजूरी दे दी है। प्रस्ताव में समुद्री सुरक्षा, नौवहन की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सरकार को सशस्त्र बलों के समन्वय से सौंपने की बात कही गई है।
वियतनाम न्यूज एजेंसी के मध्य पूर्व संवाददाता की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी संसद की समिति ने संबंधित सरकारी एजेंसियों और संगठनों से मिले लिखित सुझावों और प्रतिक्रियाओं पर चर्चा के बाद विधेयक की सामान्य सामग्री को मंजूरी दी। ईरानी सरकारी समाचार एजेंसी IRNA ने भी 9 अगस्त को समिति के प्रवक्ता हसन काश्कवी के हवाले से इसकी पुष्टि की।
प्रस्तावित विधेयक का सबसे अहम हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों के आवागमन से जुड़ा है। शुरुआती मसौदे में अमेरिका, इजरायल या अन्य देशों के स्वामित्व वाले अथवा उनके झंडे वाले जहाजों पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है, यदि उन्हें ईरान शत्रुतापूर्ण मानता है।
इसके अलावा विदेशी जहाजों के जरिए इजरायल से जुड़े सैन्य या नागरिक सामान की ढुलाई पर भी रोक लगाने का प्रस्ताव रखा गया है। नियमों के उल्लंघन की स्थिति में सामान के मूल्य के 20 प्रतिशत तक जुर्माना लगाने का प्रावधान प्रस्तावित है।
हालांकि, यह अभी कानून नहीं बना है। राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति ने फिलहाल विधेयक की सामान्य रूपरेखा को मंजूरी दी है। इसे प्रभावी होने से पहले ईरानी संसद में विधायी प्रक्रिया के कई और चरणों से गुजरना होगा। IRNA के मुताबिक, विधेयक को पहली बार 13 जुलाई को संसद में पेश किया गया था।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक समुद्री मार्गों में से एक है। फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ने वाले इस जलमार्ग से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में यहां जहाजों की आवाजाही पर किसी भी तरह की पाबंदी का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है।
ईरान का यह कदम ऐसे समय आया है जब अमेरिका और तेहरान के बीच तनाव के साथ-साथ होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी दबाव बना हुआ है।
इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 9 अगस्त को कहा कि उनके प्रशासन ने ईरान के साथ समझौते की कोशिशों को कम कर दिया है, हालांकि आर्थिक दबाव के असर की उम्मीद के बीच बातचीत की प्रक्रिया पर्दे के पीछे जारी है।
‘एक्सियोस’ को दिए एक फोन इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान के साथ फिलहाल केवल आंशिक रूप से बातचीत कर रहा है। उन्होंने ईरान की अर्थव्यवस्था को बेहद मुश्किल स्थिति में बताया और संकेत दिया कि वाशिंगटन तेहरान पर आर्थिक दबाव बढ़ा सकता है। हालांकि, इस दौरान उन्होंने ईरान के खिलाफ किसी नए सैन्य कदम की धमकी नहीं दी।
‘टाइम्स ऑफ इजरायल’ की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन का ध्यान फिलहाल होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने पर है। अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही बहाल होती है और ईरान के परमाणु कार्यक्रम में कोई महत्वपूर्ण प्रगति नहीं होती, तो ट्रंप मौजूदा युद्धविराम को जारी रख सकते हैं और तेहरान पर लगी समुद्री नाकाबंदी हटाने पर विचार कर सकते हैं।
अमेरिकी प्रशासन का आकलन बताया गया है कि ईरान अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की निगरानी से बचकर अपने परमाणु कार्यक्रम को दोबारा तेजी से आगे बढ़ाने या परमाणु हथियार बनाने की स्थिति में नहीं है।
ट्रंप पहले भी कह चुके हैं कि ईरान के साथ किसी संभावित समझौते में ऐसी ठोस व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम को दोबारा शुरू न कर सके। ऐसे में ईरानी संसद की समिति से होर्मुज को लेकर आया यह विधेयक आने वाले दिनों में अमेरिका-ईरान संबंधों के लिए एक अहम मुद्दा बन सकता है।
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