
भोपाल । पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ (Former Chief Minister Kamalnath) ने कहा कि मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार (Madhya Pradesh BJP Government) ने गेहूं खरीदी में (In Wheat Procurement) छोटे और मझोले किसानों के साथ छल किया (Cheated Small and Medium Farmers) ।
कमलनाथ ने आरोप लगाया कि सरकार की मंशा ही नहीं है कि किसानों का समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदा जाए। राज्य में इन दिनों गेहूं की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी चल रही है। राज्य सरकार किसानों का हर एक दाना खरीदने का वादा कर रही है, वहीं कांग्रेस सरकार पर सवाल उठा रही है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा है कि प्रदेश की भाजपा सरकार ने इस बार किसानों के खिलाफ ऐसा चक्रव्यूह रचा है कि किसान आसानी से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं बेच ही न पाएं।
पूर्व मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि भाजपा सरकार ने पहले तो बारदाने की कमी का बहाना बनाकर गेहूं खरीद की प्रक्रिया को करीब एक महीना पीछे खिसका दिया। इसका परिणाम यह हुआ कि छोटे किसानों को औने-पौने दाम पर बिचौलियों को गेंहूं बेचने को मजबूर होना पड़ा।जब गेंहूं खरीद प्रक्रिया शुरू हुई तो छोटे किसानों की स्लॉट बुकिंग को सैटेलाइट सर्वे का बहाना बनाकर अस्वीकृत कर दिया। किसान समझ ही नहीं पा रहा है कि उसके खेत में जो फसल खड़ी है, वह सैटेलाइट से अस्वीकृत क्यों हो रही है। इसके बाद किसानों को लगातार स्लॉट बुकिंग में समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने आरोप लगाया है कि छोटे किसानों को इस चक्रव्यूह में फंसाने के बाद सरकार मझोले और बड़े किसानों के खिलाफ नया कुचक्र लेकर आई और यह व्यवस्था कर दी कि पहले पांच एकड़ से कम के किसानों का गेंहूं खरीदा जाएगा, उसके बाद दूसरे किसानों का गेंहूं खरीदा जाएगा।सरकार को अच्छी तरह पता है कि छोटा किसान पहले ही बड़ी संख्या में बिचौलियों को गेंहूं बेच चुका है। इस तरह सरकार ने छोटे और मझोले दोनों तरह के किसानों से कम से कम गेंहूं खरीदने का तरीका निकाल लिया।
राज्य सरकार की ओर से गेहूं खरीदी के जारी किए गए आंकड़ों का जिक्र करते हुए कमलनाथ ने कहा है कि 23 अप्रैल तक के सरकारी आंकड़े बताते हैं कि जहां मध्य प्रदेश के 19 लाख से अधिक किसानों ने एमएसपी पर गेंहूं बेचने के लिये रजिस्ट्रेशन कराया है, वहीं 23 अप्रैल तक करीब 7 लाख किसानों के स्लॉट ही बुक हो सके हैं। रजिस्ट्रेशन और स्लॉट अलॉटमेंट के बीच यह भारी अंतर खुद ही सरकार के षड़यंत्र का खुलासा करता है।ऐसे में सरकार का यह कहना कि इस बार 100 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य रखा गया है, एक दिखावा ही है।
पिछले वर्ष ही मध्य प्रदेश में करीब 245 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उत्पादन हुआ था। सरकार का खुद का दावा है कि इस बार गेहूं का उत्पादन पिछले वर्ष से ज्यादा हुआ है। ऐसे में सरकार ने प्रदेश के गेहूं के कुल उत्पादन का एक छोटा हिस्सा खरीदने का ही टारगेट रखा है। पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार से मांग की है कि किसानों को चक्रव्यूह में उलझाने के बजाय अधिकतम किसानों से गेहूं की खरीद सुनिश्चित की जाए। स्लॉट बुकिंग और सैटेलाइट सर्वे की दिक्कत दूर की जाए। और वादे के मुताबिक किसानों को 2700 रुपये क्विंटल एमएसपी न देने के लिए भाजपा किसानों से माफी मांगे।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved