img-fluid

मंडी शुल्क फिर 1.5 प्रतिशत हुआ

June 20, 2026

  • कागजों में व्यापारी भरेंगे टैक्स, पर कटेगी किसान की जेब

उज्जैन। सरकार ने कृषि उपज मंडियों में लगने वाले शुल्क को फिर बढ़ाकर 1.5 प्रतिशत कर दिया है। कागजों में यह शुल्क व्यापारी और खरीदारों से वसूला जाएगा, लेकिन किसान संगठनों का आरोप है कि इसकी असली कीमत आखिरकार किसानों को ही चुकानी पड़ेगी। मंडियों में कारोबार की लागत बढऩे पर व्यापारी उसकी भरपाई किसानों की उपज के भाव में कटौती कर करेंगे। ऐसे में जिस किसान को अपनी फसल का बेहतर दाम मिलने की उम्मीद रहती है, उसकी जेब पर ही इस फैसले का असर पड़ सकता है।


  • बता दें कि ऐसे में जिस किसान को अपनी फसल का बेहतर दाम मिलने की उम्मीद रहती है, उसकी जेब पर ही इस फैसले का असर पड़ सकता है। खास बात यह है कि करीब ढाई साल पहले 6 अक्टूबर 2023 को सरकार ने किसानों और व्यापारियों को राहत देने का हवाला देते हुए मंडी शुल्क 1.5 प्रतिशत से घटाकर 1 प्रतिशत किया था, जिसे अब फिर बढ़ा दिया गया है। बढ़ा हुआ शुल्क 15 जून से लागू हो गया है। मंडी शुल्क के डेढ़ रुपए में से 75 पैसे सीधे राज्य स्तर की विभिन्न योजनाओं में जाएंगे। इनमें किसान सड़क निधि, कृषि अनुसंधान एवं अधोसंरचना विकास, गौ संवर्धन और मुख्यमंत्री कृषक कल्याण जैसी योजनाएं शामिल हैं। इसके बाद बची 75 पैसे की राशि में से 30 प्रतिशत यानी करीब 23 पैसे बोर्ड स्तर के खर्चों और व्यवस्थाओं के लिए रखे जाएंगे। शेष लगभग 52 पैसे मंडी स्तर पर खर्च होंगे। इसमें करीब 10 पैसे मंडी की स्थायी निधि में जमा किए जाएंगे, जबकि करीब 5 पैसे सुरक्षित निधि के लिए रखे जाएंगे। बची हुई लगभग 37 पैसे की राशि संबंधित मंडी के संचालन, रखरखाव, विकास कार्यों, नीलामी प्लेटफॉर्म, सड़क, पानी, बिजली और अन्य स्थानीय सुविधाओं पर खर्च की जाएगी। मान लीजिए कि प्रदेश में यदि कोई किसान मंडी में 1 लाख रुपये की फसल बेचता है, तो उस बेची गई उपज पर पहले 1,000 रुपये का मंडी शुल्क बनता था, जो अब बढ़कर 1,500 रुपये हो जाएगा। हालांकि ये शुल्क प्रत्यक्ष तौर पर व्यापारी मंडी को देता है, लेकिन किसानों का मानना है कि व्यापारी अपना मुनाफा कम नहीं करेगा, इसलिए वे फसल खरीदते समय प्रति क्विंटल पर कुछ रुपये कम की बोली लगा सकते हैं। इससे मंडी के भाव में कमी आएगी। किसान संघ के कमल सिंह आंजना का कहना है कि सीएम के सामने हमने मांग रखी है, बढ़े हुए शुल्क का आदेश वापस लेना चाहिए। कहने के लिए व्यापारी पर बोझ बढ़ा है, पर असर किसानों की ही जेब पर होगा। व्यापारी अपने मुनाफे से कोई समझौता नहीं करेगा। वह मंडी में रेट कम कर देगा।

    Share:

  • सीजफायर के कुछ घंटे बाद ही इजराइल का हमला, लेबनान में 5 की मौत

    Sat Jun 20 , 2026
    डेस्क: इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच सीजफायर लागू होने के कुछ ही घंटे बाद दक्षिणी लेबनान में फिर से हमले शुरू हो गए. लेबनान की सरकारी मीडिया के मुताबिक, शनिवार को इजराइली हवाई और ड्रोन हमलों में 5 लोगों की मौत हो गई. लेबनान की सरकारी समाचार एजेंसी NNA ने बताया कि इजराइली लड़ाकू विमान […]
    सम्बंधित ख़बरें
    लेटेस्ट
    खरी-खरी
    का राशिफल
    जीवनशैली
    मनोरंजन
    अभी-अभी
  • Archives

  • ©2026 Agnibaan , All Rights Reserved