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ऑस्ट्रेलिया से इंदौर पहुंचेगी मेट्रो अंडरग्राउंड टनल बोरिंग मशीन

April 21, 2026

इंदौर। मेट्रो प्रोजेक्ट की बाधाएं जहां कम होने का नाम नहीं ले रही, वहीं अंडरग्राउंड रुट के बढ़ाए गए ट्रैक को भी अभी तक कैबिनेट से मंजूरी नहीं मिली है। दूसरी तरफ एयरपोर्ट की ओर से मेट्रो कॉर्पोरेशन ने अंडरग्राउंड की तैयारी शुरू की है और अलग-अलग जगह बनने वाले स्टेशनों के लिए भी खुदाई की जा रही है। संभवत: जून माह तक ऑस्ट्रेलिया से टनल बोरिंग मशीन इंदौर पहुंचेगी, जो जमीन से 72 फीट नीचे मेट्रो का अंडरग्राउंड रूट तैयार करेगी। इस तरह की टनल बोरिंग मशीन वैसे तो चार लगेगी, मगर अभी शुरुआत में एक मशीन आ रही है। मेट्रो के अधिकारियों ने विदेश जाकर इस तरह की मशीनों का अवलोकन भी किया है। दूसरी तरफ अंडरग्राउंड रूट में जो क्षेत्र आ रहे हैं वहां के रहवासियों-कारोबारियों को इस बात का डर है कि उनके निर्माणों पर इसका असर तो नहीं पड़ेगा। कल हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान भी यह मुद्दा उठा। हालांकि मेट्रो कॉर्पोरेशन का कहना है कि दुनियाभर में मेट्रो अंडरग्राउंड दौड़ रही है और ऊपर के निर्माणों को कहीं कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। इंदौर मेट्रो का लगभग 32 किलोमीटर का रूट पहले चरण में तय किया गया है, जो एयरपोर्ट से लेकर एयरपोर्ट पर ही खत्म होता है। इसमें लगभग 12 किलोमीटर का अब अंडरग्राउंड और 20 किलोमीटर का एलिवेटेड कॉरिडोर रहेगा।

 

दरअसल, खजराना से एमजी रोड तक सवा 3 किलोमीटर का हिस्सा चूंकि अब अंडरग्राउंड कर दिया है, जिसके चलते इस हिस्से का नए सिरे से सर्वे और फिर टेंडर प्रक्रिया भी करना पड़ेगी। अभी गांधी नगर से लेकर रेडिसन चौराहा तक साढ़े 17 किलोमीटर के एलिवेटेड कॉरिडोर पर मेट्रो के व्यावसायिक संचालन की तैयारी भी की जा रही है। दूसरी तरफ अंडरग्राउंड रूट को लेकर भी रीगल तिराहा से लेकर निगम मुख्यालय के सामने शिवाजी मार्केट, रामचंद्र नगर सहित अन्य जगह खुदाई भी शुरू की, तो दूसरी तरफ रहवासियों-कारोबारियों का विरोध भी चल रहा है। यहां तक कि हाईकोर्ट में भी जनहित याचिका लगाई गई, जिसमें ऊपर के निर्माणों से लेकर जलस्त्रोतों सहित अन्य नुकसान की बात कही गई है। हालांकि मेट्रो कॉर्पोरेशन का कहना है कि देश के कई शहरों में और दुनियाभर में अंडरग्राउंड रूट पर मेट्रो सफलतापूर्वक दौड़ रही है और मेट्रो का मतलब ही अंडरग्राउंड है।

एलिवेटेड कॉरिडोर तो कम जगह ही निर्मित किए जा सकते हैं। दूसरी तरफ एयरपोर्ट की ओर से अंडरग्राउंड रूट की तैयारी शुरू कर दी है, क्योंकि एयरपोर्ट से लेकर गांधी नगर का हिस्सा भी अंडरग्राउंड ही रहेगा और एयरपोर्ट पर ही मेट्रो स्टेशन अंडरग्राउंड बनेगा, ताकि एयरपोर्ट के यात्रियों को भी मेट्रो का सीधा लाभ मिल सके। लिहाजा बोरिंग टनल मशीन का इस्तेमाल भी एयरपोर्ट की ओर से ही अभी शुरुआत में किया जाएगा। अभी चूंकि कई तरह की मशीनें आ गई है। लिहाजा अत्याधुनिक मशीनों की तलाश के लिए मेट्रो कॉर्पोरेशन के अधिकारियों का दल विदेश भी गया है और ऑस्ट्रेलिया से टीबीएम यानी टनल बोरिंग मशीन इंदौर पहुंचेगी। संभवत: जून में यह मशीन आएगी और फिर 1 महीने का समय इस मशीन को तैयार करने में लगेगा, क्योंकि इसके कई पार्ट स्थानीय स्तर पर ही असेम्बल यानी जोडऩा पड़ेंगे।

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