
नई दिल्ली. मानसून सत्र (Monsoon Session) से जुड़ी जानकारी सामने आई है. संसद (Parliament) का मानसून सत्र 20 जुलाई (July 20) से शुरू हो सकता है और यह करीब तीन हफ्ते (three weeks) तक चल सकता है. हालांकि कैबिनेट कमेटी ऑन पार्लियामेंट्री अफेयर्स की तरफ से अभी इस पर आखिरी फैसला लिया जाना बाकी है.
आमतौर पर मानसून और शीतकालीन सत्र में 20 बैठकें होती हैं और यह चार हफ्तों तक चलता है. लेकिन पहले भी ऐसा हो चुका है जब सत्र इससे छोटा रखा गया हो. इस बार भी अधिकारियों के मुताबिक सत्र तीन हफ्तों का हो सकता है.
यह सत्र ऐसे समय में हो रहा है जब बीजेपी को पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी में जीत मिली है. इसके साथ ही टीएमसी और शिवसेना यूबीटी में चल रही अंदरूनी टूट भी इस सत्र में असर डाल सकती है.
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के सामने टीएमसी के 20 और शिवसेना यूबीटी के 6 सांसदों की एक मांग पेंडिंग है. यह सांसद चाहते हैं कि उन्हें अलग समूह के तौर पर मान्यता दी जाए. इस पर स्पीकर का फैसला अभी आना बाकी है. राज्यसभा में भी हाल ही में नए और दोबारा चुने गए सांसदों ने शपथ ली है. इसके बाद राज्यसभा में सत्ता पक्ष यानी एनडीए की स्थिति पहले से ज्यादा मजबूत हो गई है.
पिछले सत्र में सरकार को एक बड़ा झटका लगा था. दरअसल सरकार एक संविधान संशोधन बिल लेकर आई थी जिसमें 2029 से विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने और लोकसभा की सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव था. लेकिन यह बिल लोकसभा में पास नहीं हो सका और गिर गया.
अब सरकार इस बिल को नए सिरे से तैयार कर रही है. इस बार कोशिश यह है कि सभी राज्यों में लोकसभा की सीटों को एक समान तरीके से 50 प्रतिशत तक बढ़ाया जाए. दरअसल पहले जो प्रस्ताव था उसमें आबादी के आधार पर सीटें बढ़ाने की बात थी. इससे दक्षिण भारत के राज्यों और वहां की पार्टियों को डर था कि उनकी आबादी बढ़ोतरी की रफ्तार धीमी होने की वजह से उन्हें कम सीटें मिलेंगी. यही वजह है कि दक्षिणी राज्यों की पार्टियां इस मुद्दे पर शुरू से ही आपत्ति जताती रही हैं. अब देखना यह है कि नया प्रस्ताव इस चिंता को दूर कर पाता है या नहीं.
इस तरह आने वाला मानसून सत्र कई मायनों में अहम रहने वाला है, जिसमें सीटों के बंटवारे से लेकर टीएमसी और शिवसेना यूबीटी की अंदरूनी सियासत तक कई मुद्दे छाए रहेंगे.
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