इंदौर न्यूज़ (Indore News)

150 से ज्यादा फाइलें निकली अब तक फर्जी, 16 नई फर्मों की जानकारी भी मिली, राठौर ने ही ठेकेदारों, ऑडिट और लेखा शाखा के साथ सांठगांठ कर अंजाम दिया महाघोटाले को

  • निगम भी अवैध कनेक्शनों के मामले में जीजा के खिलाफ दर्ज करवाएगा एफआईआर, अभी तक किसी बड़े अधिकारी का नाम भी नहीं कबूला, १५ तक मिला है पुलिस को रिमांड

इंदौर। पुलिस की गिरफ्त में आया निगम के फर्जी बिल घोटाले का मास्टरमाइंड पूर्व कार्यपालन यंत्री अभय राठौर ने यह तो कबूल लिया कि ठेकेदारों के साथ मिलकर फर्जी फाइलें उसके द्वारा ही बनवाई गई, जिसमें ऑडिट शाखा के साथ-साथ लेखा शाखा के भी राजकुमार सालवी जैसे कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत रही। 15 मई तक पुलिस को राठौर की रिमांड मिली है, जिसमें उसके द्वारा खरीदी गई जमीनों, सम्पत्तियों की जानकारी भी दी जा रही है। हालांकि अभी तक किसी बड़े अधिकारी का नाम उसने नहीं कबूला है। वहीं उसके बंगले से एक आईफोन भी पुलिस ने जब्त किया है। निगम का कहना है कि राठौर के जीजा राकेश चौहान के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कराई जा रही है, जिसके घर पर कई अवैध नल कनेक्शन मिले हैं।

नगर निगम में जैसे ही यह फर्जी बिल घोटाला उजागर हुआ तो पांच फर्मों के खिलाफ एफआईआर तो दर्ज करवाई ही, वहीं ड्रैनेज विभाग की लगभग 182 फाइलें ढूंढी गई, जिनमें फर्जी भुगतान की आशंका थी। निगम ने अपनी जांच रिपोर्ट में हालांकि 20 फाइलों की ही जानकारी दी, जिसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी। वहीं अभी दो दिन पहले इस पूरे घोटाले के मास्टरमाइंड बताए जा रहे अभय राठौर को उत्तरप्रदेश से गिरफ्तार किया गया और अभी उससे लगातार पुलिसिया पूछताछ की जा रही है। कोर्ट ने 15 मई तक का रिमांड दिया है। पहले तो राठौर ने इस घोटाले का पूरा ठिकरा सुनील गुप्ता पर फोडऩे का प्रयास किया, फिर उसके बाद जब ठेकेदारों से उसका आमना-सामना करवाया तो उसने कबूल किया कि फर्जी बिल घोटाले की फाइलें उसके इशारे पर ही बनी। चूंकि वह लम्बे समय तक ड्रैनेज विभाग में कार्यरत रहा, जिसके चलते सबसे अधिक फर्जी बिल फाइलें उसी विभाग की बनाई गई। दूसरी तरफ सुनील गुप्ता का कहना है कि मेरा राठौर के साथ किसी तरह का कोई लेना-देना ही नहीं है। चूंकि उसको बचना है इसलिए वह जबरन नाम ले रहा है।


आज तक किसी भी विभागीय जांच में उनकी भूमिका संदिग्ध नहीं पाई गई है। दूसरी तरफ सूत्रों का कहना है कि 16 और नई फर्मों की जानकारी सामने आई है। नगर निगम का लेखा विभाग इन फाइलों की जानकारी निकलवा रहा है, ताकि पता लगे कि इनमें कितनी फाइलें बोगस है और कितना भुगतान किया गया। वैसे भी निगम का यह फर्जी बिल घोटाला 125 करोड़ का आंकड़ा पार कर चुका है। दूसरी तरफ नगर निगम ने अभय राठौर के घर से 4 इंच का अवैध नल कनेक्शन तो पकड़ा ही, वहीं उसके रिश्तेदारों, जिसमें जीजा राकेश चौहान भी शामिल है, उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। वहीं लाखों रुपए की वसूली भी इन अवैध नल कनेक्शनों के मामलों में निगम करेगा। अभी तक 182 ड्रैनेज से जुड़ी फाइलों में से 150 से अधिक फाइलें फर्जी पाई गई हैं। वहीं निगम के ही लेखा शाखा में पदस्थ राजकुमार सालवी से संबंधित दो फाइलें सामने आई, तो एक और नई फर्म आरएस इन्फ्रास्ट्रक्चर का भी खुलासा हुआ। पुलिस की गिरफ्त में अभय राठौर के अलावा मुख्य ठेकेदार राहुल वडेरा और मोहम्मद जाकीर व अन्य भी हैं। उनसे भी लगातार पूछताछ कर रही है। वैसे तो राठौर ने अपने साथ-साथ 50 से अधिक और लोगों के नाम बताए हैं, जो इस पूरे महाघोटाले में लिप्त रहे। हालांकि पुलिस का कहना है कि इनमें ठेकेदार फर्मों के अलावा ऑडिट, लेखा शाखा के ही कर्मचारी ज्यादातर शामिल मिले हैं। आज तो पुलिस मतदान की ड्यूटी में व्यस्त है, लिहाजा कल इस मामले में राठौर सहित अन्य आरोपियों से आगे की पूछताछ की जाएगी।

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