
पन्ना. मध्यप्रदेश (MP) के दक्षिण पन्ना वनमण्डल (Emerald Forest Division) के रैपुरा रेंज से एक ऐसी खबर आई है जिसने वन्यजीव विशेषज्ञों (Wildlife experts) और ग्रामीणों को हैरान कर दिया है. आमतौर पर कुएं में गिरे तेंदुए (leopard) को किसी भी जीव के लिए मौत का पैगाम माना जाता है, लेकिन ग्राम मक्केपाला में कुएं के भीतर शिकारी और शिकार के बीच दुश्मनी की जगह अनोखी दोस्ती का मंजर देखने को मिला.
ग्राम मक्केपाला में एक तेंदुआ और बछड़ा अचानक एक गहरे कुएं में गिर गए. सूचना मिलते ही गांव में हड़कंप मच गया. दक्षिण पन्ना वनमण्डल की टीम ने बिना समय गंवाए मौके पर मोर्चा संभाला.
शिकार की जगह दिखा ‘प्रेम’
उपवनमण्डल अधिकारी रचना शर्मा और रेंज अधिकारी विवेक जैन के नेतृत्व में एक बेहद तकनीकी रेस्क्यू प्लान तैयार किया गया. जब रेस्क्यू टीम कुएं के पास पहुंची, तो वहां का नजारा देख सबकी आंखें फटी रह गईं. जिस बछड़े को तेंदुए का निवाला बन जाना चाहिए था, वह तेंदुए के साथ बेहद सहज था. बछड़ा समय-समय पर तेंदुए के पास जाकर उसे चाट रहा था. आमतौर पर हिंसक प्रवृत्ति वाला तेंदुआ भी शांत रहा और उसने बछड़े को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया.
विशेषज्ञों का मानना है कि तनावपूर्ण स्थिति में दोनों जीवों ने एक-दूसरे के साथ सुरक्षा की भावना महसूस की, जो प्रकृति का एक दुर्लभ उदाहरण है.
रेस्क्यू की ‘मास्टर प्लानिंग’
वन विभाग ने तेंदुए को बाहर निकालने के लिए लकड़ी के भारी लट्ठों और रस्सियों की मदद से एक अस्थायी सीढ़ी तैयार की. जिससे तेंदुआ बछड़े को बिना नुकसान पहुंचाए बाहर निकल गया. वह गांव में न घुसे, इसके लिए गांव की ओर ट्रैक्टरों और वाहनों की दीवार खड़ी कर दी गई.
वहीं, जंगल की ओर जाने वाले रास्ते की फेंसिंग हटा दी गई ताकि तेंदुआ सीधे अपने प्राकृतिक आवास में जा सके. रणनीति कारगर रही. तेंदुआ सीढ़ी के सहारे बाहर निकला और सीधे जंगल की ओर दौड़ गया. इसके तुरंत बाद वन विभाग ने बछड़े को भी सकुशल बाहर निकाल लिया गया.
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