
आलीराजपुर। महान स्वतंत्रता सेनानी चंद्रशेखर आजाद (Chandrashekhar Azad, the great freedom fighter) की विरासत को सहेजने के लिए मध्य प्रदेश सरकार (Madhya Pradesh Government) उनकी जन्मस्थली भाभरा में एक बड़ा पार्क (Big park) बनाएगी। इस बात की घोषणा प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शुक्रवार को की। आजाद का जन्म 23 जुलाई, 1906 को मध्य प्रदेश के झाबुआ में स्थित भाभरा में हुआ था और उन्होंने 27 फरवरी, 1931 को देश के लिए अपनी जान दे दी थी।
महानायक की पुण्यतिथि पर भाभरा में आयोजित ‘आजाद स्मृति समारोह’ में बोलते हुए, यादव ने कहा कि चंद्रशेखर आजाद नगर (भाभरा) में उनके नाम पर एक बड़ा पार्क बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि चंद्रशेखर आजाद 14 साल की छोटी सी उम्र में स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े थे और आजादी की लड़ाई में उन्होंने अपने प्राण न्यौछावर कर दिए थे।
भील समुदाय से सीखी थी निशानेबाजी
यादव ने आजाद को एक बेहतरीन निशानेबाज बताते हुए कहा कि उन्होंने अपना बचपन अलीराजपुर के भील समुदाय के बच्चों के बीच बिताया था और उनसे ही निशानेबाजी की कला भी सीखी थी। यादव ने कहा, ‘ आजाद की विरासत से जुड़ी जगहों को भी संस्कृति विभाग की मदद से पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा।’
आदिवासी नायकों से जुड़ी जगहों को संजोया जा रहा
यादव ने कहा, ‘राज्य सरकार आदिवासी महापुरुषों की विरासत को बचाने के लिए समर्पित है। खरगोन में टंट्या भील के नाम पर एक यूनिवर्सिटी बनाई गई है। इसी तरह, आजादी की लड़ाई के दूसरे आदिवासी नायकों से जुड़ी जगहों को भी संजोकर रखा जा रहा है।’
आलीराजपुर जिले को मिली 171 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात
इस दौरान मुख्यमंत्री ने आदिवासी बहुल अलीराजपुर जिले में 171 करोड़ रुपए की लागत वाले 49 विकास कार्यों का उद्घाटन और भूमिपूजन भी किया। उन्होंने कहा कि जिले में 1,800 करोड़ रुपए की लागत वाले नर्मदा सिंचाई प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है, और इसके पूरा होने पर 170 गांवों को पानी मिलेगा। उदगढ़ में मशहूर आदिवासी त्योहार भगोरिया में शामिल हुए यादव ने कहा कि इस अनुभव ने उनका दिल खुशी से भर दिया।
मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि MP सरकार ने भगोरिया को राष्ट्रीय त्योहार के तौर पर मनाने का फैसला किया है। भगोरिया त्योहार होली से ठीक पहले मनाया जाता है, जिसमें हर हफ़्ते मेले लगते हैं जो पश्चिमी मध्य प्रदेश के आदिवासियों के रंगीन त्योहारों को दिखाते हैं। ये मेले अलीराजपुर, झाबुआ, धार, खरगोन और बड़वानी जैसे आदिवासी बहुल जिलों में 100 से ज्यादा जगहों पर लगते हैं।
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