
उज्जैन। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के उज्जैन (Ujjain) में शासकीय सराफा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय (Government Sarafa Higher Secondary School) को दूसरी जगह स्थानांतरित किए जाने के खिलाफ छात्राओं के जोरदार विरोध-प्रदर्शन के बाद राज्य सरकार को अपना फैसला वापस लेना पड़ा है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (Chief Minister Dr. Mohan Yadav) की संवेदनशीलता और त्वरित निर्देश के बाद अब यह स्पष्ट कर दिया गया है कि वैकल्पिक व्यवस्था होने तक सराफा विद्यालय पूर्व की तरह अपने पुराने भवन में ही संचालित होता रहेगा।
दरअसल चार दिन पहले शुक्रवार को Gen-Z और Gen-Alpha की छात्राओं ने स्कूल शिफ्टिंग के प्रस्ताव के खिलाफ बड़ा आंदोलन किया था. छात्राओं ने महाकाल मंदिर के पीछे संचालित इस ऐतिहासिक सराफा स्कूल को दाऊदखेड़ी स्थित सांदीपनि विद्यालय में मर्ज (विलय) किए जाने का विरोध करते हुए कलेक्टर कार्यालय का घेराव किया था.छात्राओं ने प्रशासन के सामने दूरी, आवागमन की समस्याओं और अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं रखी थीं।
जब इस पूरे घटनाक्रम और छात्राओं की समस्याओं की जानकारी प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक पहुंची, तो उन्होंने तुरंत मामले पर संज्ञान लिया. सीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जब तक कोई समुचित वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक छात्राओं की पढ़ाई सराफा विद्यालय के वर्तमान भवन में ही जारी रखी जाए।
सांसद, विधायक और कलेक्टर ने छात्राओं से किया सीधा संवाद
मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद मंगलवार को उज्जैन के सांसद अनिल फिरोजिया, नगर निगम अध्यक्ष कलावती यादव, स्थानीय विधायक अनिल जैन और उज्जैन के कलेक्टर रौशन कुमार सिंह सीधे सराफा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पहुंचे. जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने छात्राओं से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं।
कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने छात्राओं को आश्वस्त करते हुए कहा,”वैकल्पिक व्यवस्था होने तक छात्राएं वर्तमान सराफा विद्यालय भवन में ही अध्ययन करेंगी. प्रदेश सरकार छात्राओं की शिक्षा, सुरक्षा और सुलभ आवागमन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और किसी भी स्तर पर सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाएगा।
छात्राओं ने जताया मुख्यमंत्री का आभार
प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की ओर से मिले इस स्पष्ट आश्वासन के बाद छात्राओं में खुशी की लहर दौड़ गई. छात्राओं ने भावुक होकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी व्यावहारिक समस्याओं को समझते हुए लिया गया यह निर्णय उनके और उनके अभिभावकों के लिए बहुत बड़ी राहत है।
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