
भोपाल। मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में शिक्षकों की तीन प्रमुख मांगों को लेकर अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चे का भोपाल में अनिश्चितकालीन धरना शुरू हो गया है। रविवार से नीलम पार्क में प्रदेशभर से शिक्षक जुटे हैं। मोर्चे ने स्पष्ट किया है कि मांगों का ठोस निराकरण होने तक धरना जारी रहेगा।शिक्षकों की प्रमुख मांगों में शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता खत्म करना, पहली नियुक्ति की तारीख से सेवा अवधि और वरिष्ठता की गणना तथा ई-अटेंडेंस को स्वैच्छिक करना शामिल है।
मोर्चे का कहना है कि इन मुद्दों को लेकर सरकार और विभागीय अधिकारियों के साथ कई बार बातचीत और ज्ञापन दिए जा चुके हैं, लेकिन अब तक मांगों पर ठोस फैसला नहीं हुआ। इसी के चलते शिक्षकों ने आंदोलन शुरू किया है। शासकीय शिक्षक संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेन्द्र कौशल ने बताया की यह धरना हर दिन अलग-अलग संभागों का रहेगा। आज भोपाल एवं नर्मदापुरम संभाग के शिक्षक शामिल हैं। कल दूसरे संभाग के शिक्षक शामिल होंगे इसी प्रकार मांगे पूरी होने तक चलता रहेगा।
इन तारीखों में ये संभाग होंगे शामिल
27 सितंबर: भोपाल एवं नर्मदापुरम संभाग के शिक्षक। इसमें भोपाल, रायसेन, राजगढ़, सीहोर, विदिशा, नर्मदापुरम, हरदा और बैतूल जिले शामिल हैं।
28 सितंबर: जबलपुर संभाग-जबलपुर, कटनी, मंडला, डिंडोरी, छिंदवाड़ा, सिवनी और नरसिंहपुर।
29 सितंबर: ग्वालियर एवं चंबल संभाग-ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, दतिया, श्योपुर, मुरैना और भिंड।
30 सितंबर: उज्जैन संभाग-देवास, रतलाम, शाजापुर, आगर-मालवा, मंदसौर, नीमच और उज्जैन।
1 अक्टूबर: रीवा एवं शहडोल संभाग-रीवा, सिंगरौली, सीधी, सतना, मैहर, उमरिया, शहडोल, मऊगंज और अनूपपुर।
2 अक्टूबर: इंदौर संभाग के शिक्षक-इंदौर, धार, अलीराजपुर, झाबुआ, खरगोन, बड़वानी, खंडवा और बुरहानपुर। इस दिन गांधी जयंती के मौके पर विशेष उपवास कार्यक्रम रखा गया है।
3 अक्टूबर: सागर संभाग-सागर, दमोह, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी।
4 अक्टूबर: जबलपुर संभाग के सभी जिलों की सहभागिता।
5 अक्टूबर: भोपाल एवं नर्मदापुरम संभाग के सभी जिलों के शिक्षक अंतरराष्ट्रीय शिक्षक दिवस कार्यक्रम में शामिल होंगे। इसके बाद संभागवार सहभागिता फिर इसी क्रम में जारी रखने की बात मोर्चे ने कही है।
हर दिन एक लाख से ज्यादा ई-मेल भेजने का अभियान
मोर्चे की ओर से मांगों को शासन तक पहुंचाने के लिए ई-मेल अभियान भी चलाया गया। संगठन ने प्रतिदिन एक लाख से अधिक ई-मेल भेजने का लक्ष्य रखा। इसके तहत अलग-अलग दिनों में मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, राज्यपाल, केंद्रीय शिक्षा मंत्री, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को ई-मेल भेजने का कार्यक्रम तय किया गया था। मोर्चा संयोजक एवं राज्य शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश यादव ने कहा कि लंबे समय से सेवाएं दे रहे शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता लागू नहीं होनी चाहिए। मोर्चे ने इस मामले में मध्यप्रदेश विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर प्रस्ताव पारित करने और केंद्र सरकार को भेजने की मांग की है।
पहली नियुक्ति से गिनी जाए पूरी सेवा
शिक्षकों की दूसरी मांग उनकी पहली नियुक्ति की तारीख से सेवा अवधि और वरिष्ठता तय करने की है। मोर्चे के अनुसार सेवा अवधि की सही गणना नहीं होने से शिक्षकों के सेवानिवृत्ति से जुड़े लाभ प्रभावित होते हैं। इसमें ग्रेच्युटी, अवकाश नकदीकरण और पेंशन जैसे लाभ शामिल हैं।
शिक्षकों ने ई-अटेंडेंस व्यवस्था को अनिवार्य रखने के बजाय स्वैच्छिक करने की मांग की है। मोर्चे के पदाधिकारियों का कहना है कि शिक्षकों को अध्यापन के साथ विभागीय और अन्य शासकीय जिम्मेदारियां भी निभानी पड़ती हैं। ऐसे में कई बार ई-अटेंडेंस को लेकर व्यावहारिक परेशानी सामने आती है।
मांगों के समाधान तक जारी रहेगा धरना
जगदीश यादव ने कहा कि शिक्षकों की ओर से पहले भी ज्ञापन, बैठक और संवाद के माध्यम से समस्याओं के समाधान की कोशिश की गई, लेकिन ठोस निर्णय नहीं होने के बाद आंदोलन शुरू करना पड़ा। प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से शिक्षक भोपाल पहुंचकर धरने में शामिल हो रहे हैं। संयुक्त मोर्चे के संयोजक राकेश दुबे, मनोहर दुबे, परमानंद डेहरिया, राकेश नायक, डीके सिंगौर और राकेश पटेल सहित विभिन्न शिक्षक संगठनों के पदाधिकारी आंदोलन में सक्रिय हैं। मोर्चे ने मांगें पूरी होने तक अनिश्चितकालीन धरना जारी रखने की बात कही है।
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