पटना। बाकीपुर विधानसभा उपचुनाव (Bakipur Assembly by-election) के लिए जन सुराज पार्टी ने प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) को उम्मीदवार घोषित कर बिहार की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। इस घोषणा के साथ ही महागठबंधन के भीतर भी मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। जहां राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने इस सीट पर अपना प्रत्याशी उतारने का ऐलान किया है, वहीं कांग्रेस ने भाजपा को कड़ी टक्कर देने के लिए साझा विपक्षी उम्मीदवार के तौर पर प्रशांत किशोर के नाम पर विचार करने की बात कही है।
प्रशांत किशोर की उम्मीदवारी की घोषणा के बाद बाकीपुर सीट का मुकाबला और रोचक हो गया है। यह विधानसभा क्षेत्र लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ माना जाता है और पिछले करीब चार दशकों से यहां पार्टी का प्रभाव बना हुआ है। ऐसे में जन सुराज ने सीधे भाजपा को चुनौती देने की रणनीति अपनाई है।
हालांकि महागठबंधन ने अभी तक इस सीट के लिए आधिकारिक उम्मीदवार घोषित नहीं किया है, लेकिन आरजेडी ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि बाकीपुर सीट पर चुनाव आरजेडी ही लड़ेगी और पार्टी अपना प्रत्याशी मैदान में उतारेगी।
उन्होंने कहा कि पिछले विधानसभा चुनाव में आरजेडी को इस सीट पर लगभग 44 हजार वोट मिले थे। इसलिए पार्टी किसी अन्य दल या उम्मीदवार के समर्थन के बजाय अपनी दावेदारी मजबूत मान रही है।
दूसरी ओर कांग्रेस ने अलग रणनीति अपनाने की वकालत की है। पार्टी प्रवक्ता ऋषि मिश्रा का कहना है कि प्रशांत किशोर को कांग्रेस और आरजेडी के शीर्ष नेतृत्व से बातचीत करनी चाहिए। यदि सभी दलों के बीच सहमति बनती है तो भाजपा के खिलाफ उन्हें संयुक्त विपक्षी उम्मीदवार के रूप में समर्थन देने पर विचार किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष एक ही उम्मीदवार पर सहमत होता है तो विपक्षी मतों का बंटवारा रोका जा सकता है और भाजपा को अधिक प्रभावी चुनौती दी जा सकती है।
आरजेडी और कांग्रेस के अलग-अलग बयानों से यह संकेत मिल रहा है कि बाकीपुर उपचुनाव को लेकर महागठबंधन के भीतर अभी एकमत नहीं है। एक पक्ष सीट पर स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने की तैयारी में है, जबकि दूसरा विपक्षी एकजुटता को प्राथमिकता देने की बात कर रहा है।
प्रशांत किशोर के चुनावी मैदान में उतरने के बाद बाकीपुर उपचुनाव का राजनीतिक महत्व और बढ़ गया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि महागठबंधन अंततः अपना अलग उम्मीदवार घोषित करता है या भाजपा के खिलाफ साझा रणनीति बनाकर किसी एक चेहरे पर सहमति बनाने की कोशिश करता है। आने वाले दिनों में इस सीट का चुनावी समीकरण और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved