इंदौर

निजी बैंक नहीं देते खैरात के लोन, परेशान प्रशासन ने सुनाया सील करने का फरमान

इंदौर। एक ओर तो प्रशासन सरकारी योजनाओं का लाभ लेने की मुहिम चला रहा है, वहीं दूसरी ओर बेरोजगारों के लोन के लिए चलाई जा रही सरकारी योजनाओं में निजी बैंक कर्ज डूबने के डर से लोन नहीं दे रही हैं। इससे जिला प्रशासन का टारगेट जहां पूरा नहीं हो पा रहा है, वहीं सरकारी योजनाओं के लाभ का प्रचार भी सवालों के घेरे में है। परेशान प्रशासन ने बैंकों के प्रॉपर्टी टैक्स, पानी के बिल, निर्माण कार्य अधिभोग और पूर्णता प्रमाण पत्र जैसी सभी जांच के निर्देश देते हुए बैंकों को सील करने का फरमान जारी कर दिया है।

सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं में बेरोजगारों को लोन के लिए प्रशासन ने निजी बैंकों को भी लक्ष्य दिया है, लेकिन निजी बैंक ऋण वापसी की गारंटी के लिए तमाम औपचारिकताओं सहित दस्तावेजों की मांग कर रही हैं। इसके चलते सरकारी योजनाओं का लाभ लेने की मुहिम और बेरोजगारों को ऋण का लक्ष्य पूरा नहीं हो पा रहा है। इस पर कलेक्टर ने भडक़ते हुए आईसीआईसीआई बैंक व एचडीएफसी बैंक के कर्ताधर्ताओं से जवाब मांगा है कि अब तक सरकारी योजनाओं के तहत दिए जाने वाले 10 हजार और 20 हजार तक के लोन स्वीकृत क्यों नहीं किए गए?

दो बैंकोंने सरकारी योजनाओं के लिए खुद को लॉगिन नहीं किया, वहीं एक बैंक में 222 केस पेंडिंग
प्रशासन ने सरकार द्वारा चलाई जा रही मुख्यमंत्री पथ विक्रेता योजना, प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना, मध्यप्रदेश ग्रामीण आजीविका मिशन, मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना में कार्य नहीं करने के कारण समीक्षा बैठक आयोजित की। इसमें एचडीएफसी बैंक व पंजाब नेशनल बैंक द्वारा अब तक लॉगिन ही नहीं करने का मामला उजागर हुआ, वहीं आईसीआईसीआई बैंक में 222 केस पेंडिंग होने की बात सामने आई। इसे लेकर कलेक्टर ने मौजूद अधिकारियों को कड़वी घुट्टी पिलाई। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन सभी बैंकों की प्रशासनिक अनियमितता की जांच की जाए और कमी पाए जाने पर बैंकों को सील कर दिया जाए।

लोन के मामले क्यों रोक रखे
कलेक्टर मनीषसिंह ने बैंक मैनेजर को अटल पेंशन योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति योजना एवं प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के बारे में आम जनता को अवगत कराने के निर्देश देते हुए कहा कि सरकार अच्छी योजनाएं चला रही है और आप उनका लाभ तक नहीं दे पा रहे, जबकि सरकार उसके एवज में बैंकों को भी अच्छा खासा फायदा दे रही है। किसान क्रेडिट कार्ड योजना के दिशानिर्देश पर काम करने की बात कहते हुए उन्होंने कहा कि किसानों, मछुआरों और पशुपालकों को इस योजना का लाभ दिलाना है। बैंकों को अब तक 1266 आवेदन दिए गए हैं, जिनमें से 609 आवेदनों में लोन दे दिया गया है, जबकि पशुपालन के लिए पहुंचे 501 आवेदनों में से 15 आवेदन ही स्वीकृत हुए हैं।

सिविल स्कोर सुधारें बैंक
बैठक में कलेक्टर ने कहा कि आवेदक लोन चुकता होने के बाद सारी एनओसी बैंकों से प्राप्त कर रहे हैं, उसके बावजूद उसके सिविल स्कोर को सुधारा नहीं जा रहा है। बैंकों की लापरवाही के चलते लोग लोन नहीं ले पा रहे हैं। कई मामलों में पेनकार्ड नंबर ही गलत लिखे होने की सूचना मिली है। इसे जल्द से जल्द ठीक करें।

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