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करप्शन पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपना पाएंगे राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा


जयपुर । राजस्थान के मुख्यमंत्री (Rajasthan Chief Minister) भजनलाल शर्मा (Bhajanlal Sharma) करप्शन पर (On Corruption) जीरो टॉलरेंस की नीति (Zero Tolerance Policy) अपना पाएंगे (Will be able to Adopt) ? करप्शन पर अंकुश लगाने के लिए भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) लगातार छापेमारी करने के साथ ही गांव-कस्बों में जाकर लोगों को जागरूक कर रहा है। मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा भी करप्शन पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने का दावा कर रहे हैं। वे जोर देकर कह रहे हैं कि भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आखिर कौन सा भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, यह समझ से परे है, क्योंकि अधिकारी, कर्मचारियों से लेकर सरपंच और पटवारी तक किसी पर भी इन बातों का कोई असर नहीं है। वे जरूरतमंद से खुलकर डिमांड कर लेते हैं।



अब जयपुर जिले में फागी तहसील के डाबलाखुर्द का ही मामला ले लीजिए। खरीदी हुई कृषि भूमि की रजिस्ट्री करवाने के बावजूद नामांतकरण खुलवाने के लिए मनोज कंसल नामक व्यक्ति पिछले 5 महीने से तहसील और ग्राम पंचायत के चक्कर लगा रहा है। तहसीलदार माधोराजपुरा, हलका पटवारी और सरपंच जमीन की विक्रय राशि की 1 प्रतिशत राशि मांग रहे हैं, लेकिन मनोज कंसल को समझ नहीं आ रहा है कि यह कौन सा शुल्क है और किस नियम के तहत मांगा जा रहा है। इसलिए उन्होंने जिला कलेक्टर जयपुर को शिकायत भेजकर इस मामले की जांच करवाकर दोषी लोगों पर कार्रवाई किए जाने की मांग की है।

मानसरोवर में वीटी रोड निवासी मनोज कंसल के मुताबिक उन्होंने माधोराजपुरा तहसील के डाबलाखुर्द गांव में खसरा नंबर 753/676, 756/684, 759/682, 752/676, 755/684 की जमीन दो क्रय पत्रों से खरीद करके उसकी माधोराजपुरा में 23 जुलाई, 2023 को रजिस्ट्री खुलवा ली थी। कायदे से सब रजिस्ट्रार को खुद ही रजिस्ट्री की एक प्रति जमीन का नामांतकरण खोलने के लिए तहसील को भिजवा देनी चाहिए थी।

नियमानुसार 7 दिन में नामांतकरण खुल जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ, बल्कि बार-बार चक्कर लगाने के बावजूद 28 दिसंबर, 2023 तक उसका नामांतरण नहीं खोला गया था। शिकायत की एक कॉपी भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को भी भिजवाई गई है। खास बात यह है कि घूसखोर अफसर-कर्मचारी पहले तो सुविधा शुल्क के नाम पर रिश्वत मांगते हैं। फिर काम बिगाड़ने का डर दिखाते हैं। इस पर भी जब कोई जांच शुरू होती है तो फरियादी को ही झूठा साबित करके काम नहीं होने के लिए तकनीकी कारण बताने लगते हैं। फरियादी से रिश्वत की मांग के सबूत मांगने लगते हैं।

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