
वॉशिंगटन। पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी भीषण संघर्ष का असर अब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) पर साफ दिखने लगा है। जरूरी वस्तुओं की सप्लाई बाधित हो रही है और कई देशों में इसका असर महसूस किया जा रहा है। इसी बीच ईरान ने इस स्थिति के लिए खुद को जिम्मेदार मानने से इनकार करते हुए सारा दोष अमेरिका और इस्राइल (America and Israel) पर मढ़ दिया है।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि भारत सहित कई देशों में जो संकट पैदा हुआ है, उसके लिए ईरान जिम्मेदार नहीं है। उन्होंने दावा किया कि यह पूरा संघर्ष ईरान पर थोपा गया है और स्थिति से वह भी खुश नहीं है।
ईरान का आरोप- “आक्रामकता की शुरुआत उन्होंने की”
इस्माइल बघाई ने एक विशेष बातचीत में कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अमेरिका और इस्राइल की भूमिका पर जवाबदेही तय करनी चाहिए। उनके अनुसार, इन देशों की ओर से शुरू की गई कार्रवाई अब तक जारी है। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने 28 फरवरी का हवाला देते हुए कहा कि उस तारीख से पहले यह समुद्री मार्ग सभी देशों के लिए खुला और सुरक्षित था। इसी मार्ग से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल व्यापार होता है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित होती है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का रुख
ईरान का कहना है कि उसने जो भी कदम उठाए हैं, वे अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में हैं। बघाई के अनुसार, अमेरिका और इस्राइल ने खाड़ी देशों की जमीन का इस्तेमाल ईरान पर हमले के लिए किया, जिसके जवाब में उसे कार्रवाई करनी पड़ी। ईरान का यह भी तर्क है कि वह खुद भी इस समुद्री मार्ग पर निर्भर है, इसलिए उसकी भी प्राथमिकता इसकी सुरक्षा है।
अमेरिका की सख्ती और ट्रंप की रणनीति
दूसरी ओर, अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक दबाव और बढ़ा दिया है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने वैश्विक बैंकों को ईरानी मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क पर निगरानी कड़ी करने के निर्देश दिए हैं। अमेरिका का आरोप है कि ईरान शेल कंपनियों और क्रिप्टो नेटवर्क के जरिए प्रतिबंधित तेल की तस्करी कर रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ जारी संघर्ष विराम अब “लाइफ सपोर्ट” पर है और उन्होंने तेहरान के शांति प्रस्ताव को खारिज कर दिया है।
तेल तस्करी पर वैश्विक निगरानी बढ़ी
अमेरिकी प्रशासन ने बैंकों से संदिग्ध लेनदेन करने वाली कंपनियों की पहचान करने को कहा है। खासकर मलेशियाई ब्लेंड के नाम पर हो रही ईरानी तेल बिक्री पर नजर बढ़ा दी गई है। एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में ईरान से जुड़ी कंपनियों ने करीब 4 अरब डॉलर के लेनदेन किए। अब अमेरिका इराक, यूएई और ओमान जैसे देशों पर भी दबाव बना रहा है, ताकि ईरान की आर्थिक गतिविधियों पर अंकुश लगाया जा सके।
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