नई दिल्ली। कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर मुख्यमंत्री बदलने की अटकलें जोर पकड़ने लगी हैं। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया सरकार (Chief Minister Siddaramaiah Government) के तीन साल पूरे होने के मौके पर कांग्रेस के भीतर हलचल तेज हो गई है। बताया जा रहा है कि सीएम के करीबी माने जाने वाले चार वरिष्ठ मंत्रियों की एक बैठक के बाद राजनीतिक चर्चाओं का दौर और तेज हो गया।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मंत्री एचसी महादेवप्पा, बीजेड ज़मीर अहमद खान, के वेंकटेश और लोक निर्माण मंत्री सतीश जरकीहोली ने मंगलवार सुबह आपस में मुलाकात की। कहा जा रहा है कि यह बैठक सतीश जरकीहोली के आवास पर हुई, जहां राज्य की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों पर चर्चा की गई।
बैठक के बाद सभी नेता सिद्धारमैया सरकार के तीन साल पूरे होने के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए तुमकुरु रवाना हो गए।
यह मुलाकात कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक केएन राजन्ना के उस बयान के बाद हुई, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर पार्टी हाईकमान नेतृत्व परिवर्तन पर विचार करता है, तो मुख्यमंत्री पद के लिए गृह मंत्री जी परमेश्वर के नाम पर भी विचार होना चाहिए।
हालांकि, ज़मीर अहमद खान ने किसी “गुप्त बैठक” की बात से इनकार किया। उन्होंने कहा कि सभी नेता सिर्फ नाश्ते पर मिले थे और उसके बाद कार्यक्रम के लिए रवाना हुए।
इसी बीच उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार का तिरुपति मंदिर जाना भी चर्चा का विषय बन गया। तुमकुरु कार्यक्रम से कुछ घंटे पहले उनका तिरुपति बालाजी मंदिर पहुंचना राजनीतिक गलियारों में कई तरह के कयासों को जन्म दे रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्य में संभावित नेतृत्व परिवर्तन को लेकर कांग्रेस के भीतर अलग-अलग गुट सक्रिय दिखाई दे रहे हैं।
मुख्यमंत्री पद की संभावित दौड़ में गृह मंत्री जी परमेश्वर का नाम भी सामने आ रहा है। दलित समुदाय से आने वाले परमेश्वर लंबे समय से कांग्रेस संगठन में सक्रिय रहे हैं। वह पहले प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री भी रह चुके हैं।
तुमकुरु कार्यक्रम में सिद्धारमैया ने आयोजन में परमेश्वर की भूमिका की खुलकर सराहना की, जिससे उनके नाम को लेकर चर्चाएं और तेज हो गईं।
कांग्रेस हाईकमान की ओर से फिलहाल नेतृत्व परिवर्तन को लेकर कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया गया है। हालांकि पार्टी के भीतर इस मुद्दे पर लगातार चर्चा जारी है।
सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार दोनों सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि वे हाईकमान के फैसले को स्वीकार करेंगे। बावजूद इसके, दोनों नेताओं के समर्थक अपने-अपने दावे मजबूत करने में जुटे हैं।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि नवंबर 2025 में सिद्धारमैया के कार्यकाल के 30 महीने पूरे होने के बाद से ही डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं।
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