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पूर्वी भारत के लोग चाइनीज तो दक्षिण के लोग अफ्रीकन जैसे लगते हैं- सैम पित्रोदा

नई दिल्‍ली: विरासत टैक्‍स की बात छेड़कर विवाद पैदा करने वाले इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के प्रमुख सैम पित्रोदा ने एक बार फिर से ऐसी बात कही है, जिसको लेकर चुनावी मौसम में जुबानी लड़ाई फिर से तेज हो सकती है. सैम पित्रोदा ने दुनियाभर में भारत की विकासगाथा और लोकतंत्र के बेहतरीन उदाहरण के तौर पर सामने आने का उल्‍लेख करते हुए कुछ ऐसा कह डाला जिसपर विपक्षी बीजेपी हमलावर हो गई है. सैम पित्रोदा ने कहा कि पूर्वी भारत के लोग जहां चाइनीज जैसे लगते हैं, वहीं दक्षिण भारतीय अफ्रीकन लगते हैं. इतनी विविधता होने के बावजूद भारत एक है.


कौन हैं सैम पित्रोदा?
सैम पित्रोदा का पूरा नाम सत्यनारायण गंगाराम पित्रोदा है. उनकी पहचान टेलीकॉम इन्वेंटर और एंटरप्रेन्योर के तौर पर है. वो लगभग 50 साल से टेलीकॉम और कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी पर काम कर रहे हैं. भारत के ओडिशा के तितिलागढ़ में गुजराती परिवार में 1942 में उनका जन्म हुआ था. सात भाई-बहनों में पित्रोदा तीसरे नंबर पर हैं. गुजरात के एक बोर्डिंग स्कूल से पढ़ाई करने के बाद उन्होंने वड़ोदरा की महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी से फिजिक्स और इलेक्ट्रॉनिक्स में मास्टर्स डिग्री ली. आगे की पढ़ाई के लिए वो अमेरिका चले गए.

1964 में शिकागो के इलिनोइस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से उन्होंने फिजिक्स में मास्टर्स डिग्री हासिल की थी. वह पढ़ाई पूरी करने के बाद 1965 में वो टेलीकॉम इंडस्ट्री से जुड़ गए. 1975 में उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक डायरी का आविष्कार किया था. ये उनका पहला पेटेंट था. अपने करियर में उन्होंने कई पेटेंट दाखिल किए. उन्होंने मोबाइल फोन पर बेस्ट ट्रांजेक्शन टेक्नोलॉजी का पेटेंट भी दायर किया था.

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