भोपाल न्यूज़ (Bhopal News)

जुलाई में आने वाले दिनों में नहीं होगी जोरदार बारिश

भोपाल। जुलाई माह में जहां प्रति वर्ष अच्छी खासी बारिश होती रहती है वही इस बार जुलाई में कम बारिश हो पाई है। जून और जुलाई बीत चुके हैं सितंबर में बारिश कम ही होती है। जुलाई और अगस्त में ही शहर में अच्छी बारिश होती है लेकिन मौसम विभाग के अनुसार इस साल अब तक बंगाल की खाड़ी पर कोई प्रभावशाली सिस्टम बन नहीं पाया है इसलिए शहर में अच्छी बारिश नहीं हुई है। अब सारी उम्मीदें अगस्त से ही हैं। 1 जुलाई तक मप्र में सामान्य से ज्यादा बारिश का आंकड़ा 62 फीसदी था, जो 19 जुलाई को घटकर सिर्फ 5 फीसदी रह गया। इस दौरान प्रदेश के सिर्फ 2 जिलों ग्वालियर व जबलपुर में ही सामान्य से कम बारिश हुई थी, 19 जुलाई तक सामान्य से कम बारिश वाले जिलों की तादाद बढ़कर 14 हो गई। इन 19 जिलों में भोपाल जिले में सामान्य से ज्यादा बारिश का आंकड़ा 224 से घटकर 62 फीसदी रह गया। मानसून की इस बेरुखी से जमीन सवा फीट तक सूख चुकी है। सोयाबीन के पौधे मुरझाने लगे हैं। खेतों में जमीन पर दरारें पड़ चुकी है। मानसून ट्रफ लाइन रविवार से देश के उत्तरी हिस्से में शिफ्ट हो गई है। इसके कारण इस माह भोपाल संभाग समेत प्रदेश के ज्यादातर इलाकों में भारी बारिश के आसार कम हैं। मप्र में भारी बारिश के लिए बंगाल की खाड़ी में लो प्रेशर एरिया यानी कम दबाव का क्षेत्र बनना जरुरी है। मानसूनी सिस्टमों का सपोर्ट भी जरुरी है। फिलहाल, ऐसी संभावनाएं भी कम हैं। यही दो वजह हैं कि इस माह प्रदेश के ज्यादातर संभागों में एक साथ मूसलाधार बारिश नहीं होने का अनुमान है।

फिलहाल सिस्टम सक्रिय नहीं
मौसम विभाग का कहना है कि मध्य प्रदेश में फिलहाल अभी कोई सिस्टम सक्रिय नहीं है। सिस्टम सक्रिय न होने से बारिश की उम्मीद फिलहाल कम है। इस साल मानसून एक दिन पहले यानि 14 जून को प्रदेश प्रवेश किया था। प्री मानसून में अच्छी बारिश रिकॉर्ड हुई। इसके बाद भी अलग-अलग दौर में बारिश हुई। जून के अंत तक सामान्य से 73 प्रतिशत अधिक बारिश हो चुकी थी। जुलाई में अब तक मानसून मेहरबान नहीं हुआ है। 19 जुलाई तक कुल बारिश 314 मिलीमीटर पर ही पहुंची है, जो कि मात्र 5 फीसदी अधिक है।

8 साल बाद बने ऐसे हालात
मध्य प्रदेश में 8 साल बाद इस तरह के हालात बने हैं। साल 2012 की जुलाई में 35.7 मिली मीटर बारिश रिकॉर्ड हुई थी। अगस्त में बारिश से मानसून का कोटा पूरा हो गया था। साल 2010 की बात की जाए तो जुलाई में 244 मिलीमीटर बारिश हुई थी, लेकिन पूरे सीजन में मात्र 597.5 मिलीमीटर पानी बरसा था। इस साल प्रदेश के 20 जिलों में सबसे कम यानी सामान्य से भी कम बारिश अब तक दर्ज हुई है।

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