इंदौर न्यूज़ (Indore News)

ऐसा विकास इंदौर जिले के 150 गांव आज भी प्यासे

बुरहानपुर जैसे छोटे जिले ने भी पछाड़ा इंदौर को

वोट के लिए विकास के दावे…. और हकीकत उल्टी

इंदौर। स्वच्छता के बाद मतदान (Voteing) में भी आगे बढ़ाने वाली जनता को ही उनके हक नसीब नहीं हो पा रहे हैं। जनप्रतिनिधियों ने बड़े-बड़े वादे कर मतदाताओं से वोट ले लिए, लेकिन अब भी 150 गांव ऐसे हैं, जो पानी के लिए तरस रहे हैं। नल जल योजना में इंदौर बुरहानपुर जिले से भी पिछड़ गया है।

2020 से शुरू हुई नल जल योजना के माध्यम से इंदौर जिले के 567 गांवों में पानी पहुंचाने का काम जून महीने तक किया जाना था, लेकिन 417 गांवों में पानी पहुंचाने के बाद 150 गांवों को अधिकारियों के साथ-साथ जनप्रतिनिधि भी भूल गए। जून से लेकर अब तक भी न तो अधिकारियों ने सुध ली और न ही कोई नेता प्यास बुझाने आया। बुरहानपुर जैसे छोटे जिले ने इंदौर को पछाड़ते हुए वाटरप्लस (Water Plus) का ताज अपने नाम कर लिया है, लेकिन इंदौर अब भी पीछे चल रहा है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जलजीवन योजना का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन कराने के लिए अब आम जनता को ही आगे आना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने अधिकारियों से इसकी शिकायत भी की है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि पांच ठेकेदारों द्वारा काम नहीं करने से दोबारा टेंडर प्रक्रिया कराई गई। इसलिए योजना में देरी हुई है।


टंकिया ही नहीं लगी
पूरे जिले में 1000 से अधिक जनसंख्या वाले गांवों को पानी की सप्लाय टंकी से और इससे कम जनसंख्या वाले गांव को सीधी सप्लाय करनी थी, जिसके लिए 237 गांवों का चयन टंकी के निर्माण के लिए किया गया था, लेकिन 13 गांव अब भी पानी की टंकी के लिए ही काम शुरू नहीं करवा पाए हैं। हालांकि 371 गांवों में स्वचलित पानी वितरण की व्यवस्था लागू की गई है। घरों में नल से पानी की आपूर्ति स्वचलित संसाधनों से लगातार की जा रही है। इन टंकियों पर पानी की बर्बादी रोकने के लिए आटोमैटिक बंद और चालू होने वाले सिस्टम की व्यवस्था की है। मोबाइल ऐप (mobile app) से अधिकारियो द्वारा मानिटरिंग भी की जा रही है।

ट्रायल में भी देरी
अधिकारियों के अनुसार जिले की जिन 417 पंचायतों में योजना का कार्य पूरा हो चुका है, उनमें 307 गांवों में योजना पंचायतों को सौंपी जा चुकी है। बाकी 110 गांवों में ट्रायल किया जा रहा है। तीन माह के ट्रायल के बाद पंचायतों को संचालन सौंपा जाना था, लेकिन चुनाव की गतिविधियों में व्यस्त होने के कारण यह प्रक्रिया धीमी गति से चल रही है। अब तक ट्रायल रन पूरा ही नहीं किया जा सका है।

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