नई दिल्ली। वित्त मंत्रालय टैक्स (finance ministry tax) को लेकर समय समय पर अपनी आर्थिक नीतियों (economic policies) में बदलाव करता रहता है। इस बार भी अपने बजट में भी बदलाव किए गए हैं। अब वित्त मंत्रालय (finance ministry tax) के अधीन आने वाला राजस्व विभाग दीर्घकालिक लाभ पर लगने वाले कर में बड़े बदलाव की तैयारी कर रहा है। राजस्व सचिव तरुण बजाज ने बुधवार को कहा कि सरकार शेयरों, ऋण और अचल संपत्ति पर पूंजीगत लाभ कर की गणना के लिए विभिन्न दरों और होल्डिंग अवधि में बदलाव करने के लिए तैयार है।
अभी सरकार करदाताओं से दो प्रकार का पूंजीगत लाभ कर लेती है। इसको शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स (एसटीसीजी) और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (एलटीसीजी) कहा जाता है। सामान्य तौर पर 36 महीने से कम अवधि में बेची जाने वाली संपत्ति पर एसटीसीजी वसूला जाता है, जबकि इससे ज्यादा अवधि के बाद बेची जाने वाली संपत्ति पर एलटीसीजी वसूला जाता है। एसटीसीजी की गणना करदाता पर लागू होने वाले सामान्य आयकर की दर के आधार पर होती है। जबकि किसी कंपनी के इक्विटी शेयर, इक्विटी आधारित म्यूचुअल फंड की यूनिट या कारोबारी ट्रस्ट से होने वाले पूंजीगत लाभ पर 10 से 20 फीसदी की दर से कर की गणना होती है। यह कर सामान्य आयकर से अतिरिक्त होता है। इसको एलटीसीजी भी कहा जाता है। आयकर की देनदारी ना होने के बावजूद एलटीसीजी का भुगतान करना होता है।
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