
नई दिल्ली । प्रेमानंद महाराज (Premanand Maharaj) को संस्कृत (Sanskrit) बोलने की चुनौती देने वाले जगद्गुरु रामभद्राचार्य (Jagadguru Rambhadracharya) ने सफाई पेश की है। नए वीडियो में कहा है कि उन्होंने प्रेमानंद महाराज पर कोई भी अभद्र टिप्पणी नहीं की है और जब भी प्रेमानंद जी उनसे मिलने आएंगे तो वह आशीर्वाद देंगे और उन्हें ह्रदय से लगाएंगे। एक दिन पहले जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने प्रेमानंद पर ऐसा बयान दिया था, जिससे बवाल मच गया था। प्रेमानंद महाराज के भक्त जगद्गुरु रामभद्राचार्य पर नाराज हो गए थे। दरअसल, रामभद्राचार्य ने कहा था कि मैं चैलेंज करता हूं कि प्रेमानंद संस्कृत का एक भी अक्षर बोलकर दिखा दें या फिर श्लोकों का अर्थ समझा दें।
सफाई पेश करते हुए जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने सोमवार को कहा, ”आज सनातन धर्म पर चारों ओर से आक्रामण हो रहे हैं, हिंदुओं को इकट्ठा होने की जरूरत है। हमने पांच सौ वर्ष की लड़ाई जीती और राम मंदिर मिला। अब श्रीकृष्ण जन्मभूमि और काशी विश्वनाथ भी मिलेगा, लेकिन सबको एक एकजुट होना होगा। रही बात प्रेमानंद की तो मैंने कोई भी अभद्र टिप्पणी नहीं की है। एक आचार्य होने के नाते में सबसे कहता हूं कि संस्कृत का अध्ययन करना चाहिए। जो सामान्य लोग चोला पहनकर वक्तव्य दे रहे हैं, जिन्हें एक भी अक्षर नहीं आता है, मैंने उत्तराधिकारी को भी कहा है कि संस्कृत पढ़ना चाहिए। मैं तो सबको कह रहा हूं कि हर हिंदू को संस्कृत पढ़ना चाहिए। आज भी मैं खुद पढ़ता हूं, 18-18 घंटे पढ़ता हूं।”
उन्होंने आगे कहा, ”प्रेमानंद जी के लिए कोई मैंने ऐसी टिप्पणी नहीं की, लेकिन हां चमत्कार को नमस्कार नहीं करता हूं। यह सच है। मैंने शिष्य धीरेंद्र शास्त्री को कहा कि पढ़ो-लिखो, क्योंकि भारत की जो प्रतिष्ठाएं हैं, संस्कृत को पढ़ना जरूरी है। विधर्मी शक्तियां सनातन धर्म को तोड़-मरोड़कर पेश करती हैं। सभी संतों को एक हो जाना चाहिए। एक होकर हिंदू धर्म की रक्षा करनी चाहिए। भारतीय संस्कृति को समझने के लिए संस्कृत पढ़ना चाहिए। मेरे लिए जो भ्रम फैलाया जा रहा है, वह गलत है। मैंने प्रेमानंद के लिए कोई भी गलत टिप्पणी नहीं की और न ही करूंगा। जब भी प्रेमानंद जी मुझसे मिलने आएंगे तो निश्चित ही आशीर्वाद दूंगा और दिल से लगाऊंगा। भगवान श्रीराम जी से प्रार्थना करता हूं उनके स्वास्थ्य के लिए। लगातार उनके दीर्घायु के लिए कामना करता रहूंगा।”
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