
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को शांतिपूर्ण और हिंसा मुक्त बनाने के लिए चुनाव आयोग ने पुलिस प्रशासन में भारी फेरबदल किया है. आयोग ने 1992 बैच के आईपीएस सिद्धनाथ गुप्ता को राज्य का नया डीजी और पुलिस प्रमुख (प्रभारी) नियुक्त किया है. इसके साथ ही आईपीएस अजय कुमार नन्द को कोलकाता का नया पुलिस कमिश्नर बनाया गया है ताकि सुरक्षा व्यवस्था को नई दिशा मिल सके. नटराजन रमेश बाबू को सुधारात्मक सेवाओं का महानिदेशक और अजय मुकुन्द रानाडे को एडीजी (कानून व्यवस्था) की जिम्मेदारी दी गई है. आयोग ने सख्त निर्देश दिया है कि ये सभी अधिकारी तत्काल अपना कार्यभार संभालें और 16 मार्च तक इसकी रिपोर्ट जमा करें.
मुख्य सचिव और गृह सचिव पर भी गिरी गाज
पुलिस अधिकारियों के अलावा चुनाव आयोग ने ममता प्रशासन के दो सबसे बड़े आईएएस अधिकारियों को भी उनके पदों से हटा दिया है. मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती की जगह अब 1993 बैच के आईएएस दुष्यंत नारियाला राज्य के नए मुख्य सचिव होंगे. इसी तरह गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीणा को हटाकर 1997 बैच की आईएएस अधिकारी संघमित्रा घोष को गृह और पहाड़ी मामलों का प्रधान सचिव नियुक्त किया गया है.
आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि हटाए गए किसी भी अधिकारी को चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक चुनाव से जुड़ा कोई भी काम नहीं दिया जाएगा. यह कदम मुख्य चुनाव आयुक्त के उस वादे को निभाने के लिए उठाया गया है जिसमें उन्होंने बंगाल में पारदर्शी चुनाव कराने की बात कही थी.
टीएमसी का विरोध और संसद से वॉकआउट
चुनाव आयोग के इस कड़े फैसले पर तृणमूल कांग्रेस ने कड़ी आपत्ति जताई है और इसे लोकतंत्र पर हमला करार दिया है. टीएमसी सांसद सागरिका घोष ने कहा कि आधी रात को जिस तरह से मुख्य सचिव और गृह सचिव को बदला गया वह पूरी तरह से गलत है. उनका आरोप है कि आयोग अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल कर बंगाल की चुनी हुई सरकार को अस्थिर करने की कोशिश कर रहा है. इस फैसले के विरोध में टीएमसी नेता डेरेक ओ’ब्रायन के नेतृत्व में पार्टी के सभी सांसदों ने पूरे दिन के लिए संसद की कार्यवाही से वॉकआउट कर दिया. पार्टी का कहना है कि वे इस प्रशासनिक हस्तक्षेप के खिलाफ अपनी आवाज उठाते रहेंगे.
हिंसा मुक्त चुनाव के लिए आयोग की सक्रियता
चुनाव आयोग का यह पूरा एक्शन बंगाल में चुनावी हिंसा को रोकने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने पहले ही साफ कर दिया था कि राज्य में शांतिपूर्ण मतदान उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है. पुलिस और प्रशासन के ऊपरी ढांचे में यह बदलाव जमीनी स्तर पर कानून व्यवस्था को सुधारने के लिए किया गया है. आयोग चाहता है कि नई नियुक्तियों के जरिए प्रशासन में ताजगी आए और किसी भी तरह के राजनीतिक पक्षपात की गुंजाइश न रहे. दो चरणों में होने वाले इस चुनाव में अब इन नए अधिकारियों के कंधों पर सुरक्षा की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होगी ताकि हर नागरिक निडर होकर अपने मताधिकार का प्रयोग कर सके.
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