
इंदौर। भागीरथपुरा में हुए दूषित जल हादसे के बाद इंदौर नगर निगम द्वारा पानी के नमूनों की जांच के लिए आधुनिक प्रयोगशाला तैयार करने का फैसला लिया गया है। ऐसी प्रयोगशाला तैयार की जाएगी, जिसमें 2000 नमूनों की एक साथ जांच हो सकेगी।
जिस समय भागीरथपुरा में दूषित जल सप्लाई किए जाने के कारण बड़ी संख्या में लोग बीमार होने लगे और फिर 36 लोगों की मौत हो गई, उस समय इंदौर नगर निगम द्वारा पानी के जो नमूने संग्रहित करके जांच के लिए भेजे गए उनकी रिपोर्ट का 3 दिन तक इंतजार करना पड़ा था। यह स्थिति खराब थी। जितने समय में रिपोर्ट आ रही थी उतने समय में तो पानी में यदि कोई समस्या है तो उसके कारण जनता के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ जाता।
ऐसे में उस समय भी इस बात की आवश्यकता महसूस की जा रही थी कि इंदौर नगर निगम के पास खुद की ही आधुनिक लैब होना चाहिए। अब जब नगर निगम द्वारा नए वित्त वर्ष का बजट तैयार किया जा रहा है तो इस बजट में मूसाखेड़ी में नर्मदा परियोजना के कार्यालय के परिसर में एक आधुनिक लैब विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया है। बजट में कहा गया है कि इस प्रयोगशाला में एक साथ कम से कम 2000 नमूनों की जांच हो सकेगी। इस प्रयोगशाला की स्थापना के लिए बजट में 10 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
इस समय इंदौर नगर निगम द्वारा इंदौर शहर में 105 टंकियों से जल प्रदाय किया जाता है। आने वाले समय में 45 टंकियों का निर्माण और किया जाना है। इस तरह इंदौर में जल प्रदाय करने वाली टंकियों की संख्या बढक़र 150 हो जाएगी। इसके साथ ही नगर निगम द्वारा जब भी, जहां भी कहीं पानी की नई लाइन डाली जाएगी तो वहां पानी सप्लाई करने से पहले उस लाइन से पानी के नमूने लेकर उसकी जांच भी की जा सकेगी। इस आधुनिक प्रयोगशाला के बन जाने से यह संभव हो सकेगा। इस प्रयोगशाला में इंदौर के साथ ही आसपास के जिलों से भी पानी के नमूने जांच के लिए आ सकेंगे। नगर निगम द्वारा अब पानी की शुद्धता को स्थापित रखने के लिए एक तरफ जहां प्रयोगशाला के निर्माण की पहल की जा रही है तो वहीं दूसरी तरफ वाटर ऑडिट थर्ड पार्टी के माध्यम से कराने के लिए भी निगम द्वारा टेंडर जारी किया जा चुका है।
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