
देहरादून। उत्तराखंड (Uttarakhand) के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत (Congress leader Harish Rawat) ने राजनीति से 15 दिन का अवकाश लेने की घोषणा की है। इस निर्णय का समय ऐसे में आया है जब भाजपा (BJP) के कई नेताओं के कांग्रेस में शामिल होने की चर्चाएं तेज हो रही हैं। रावत ने इसे अपनी 60 वर्षों की राजनीतिक यात्रा के बाद अर्जित अवकाश बताया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे उनकी नाराजगी के रूप में भी देखा जा रहा है। इस दौरान वे राजनीतिक कार्यों से दूर रहकर मंदिरों में पूजा-अर्चना और सामाजिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे।
राजनीति से 15 दिन का ‘व्रत’
भाजपा के उत्तराखंड इकाई के नेताओं के कांग्रेस में शामिल होने की चर्चाओं के बीच हरीश रावत ने 15 दिन तक राजनीति से संन्यास लेने का ऐलान किया। इसे कांग्रेस में उनकी नाराजगी के संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है।
मौके पर नहीं होंगे हरीश रावत
हरीश रावत ने यह व्रत तब लिया है जब शनिवार को यह चर्चा तेज थी कि भाजपा के कुछ नेता कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं। ऐसे में इन नेताओं के शामिल होने के समारोह में रावत उपस्थित नहीं रहेंगे।
60 वर्षों के राजनीतिक सफर पर मनन
हरीश रावत ने बताया कि उन्होंने बिजली-पानी की दरें बढ़ाने के इरादे के विरोध में एक घंटे का मौन व्रत रखा और मां दुर्गा के सभी स्वरूपों की आराधना करते हुए अपने 60 वर्षों के सार्वजनिक जीवन की राजनीतिक यात्रा पर मनन किया।
व्रत के दौरान क्या करेंगे हरीश रावत?
उन्होंने कहा कि इस दौरान मैं मंदिरों में पूजा-अर्चना करूंगा, कुछ ईद मिलन और मांगलिक समारोहों में भाग लूंगा। साथ ही अपनी जीवन यात्रा के उन प्रसंगों और मोड़ों को याद करने का प्रयास करूंगा जो समय के साथ पीछे चले गए हैं।
कांग्रेस में शामिल होने वाले भाजपा नेता
सूत्रों के अनुसार शनिवार को दिल्ली में उत्तराखंड प्रदेश भाजपा के कुछ नेता कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं। इनमें प्रमुख नाम हैं: रुद्रपुर से राजकुमार ठुकराल, ऊधमपुर के सितारगंज से नारायण पाल, घनशाली से भीमलाल आर्य, भीमताल से लाखन नेगी और रुड़की से गौरव गोयल। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब उत्तराखंड में अगले साल फरवरी-मार्च में विधानसभा चुनाव संभावित हैं।
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