कोलकाता। ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंचने और वकीलों का काला गाउन पहनने को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। इस मुद्दे पर (Markandey Katju) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है, जबकि Bar Council of India (BCI) ने भी पश्चिम बंगाल बार काउंसिल से रिपोर्ट तलब कर ली है।
पूर्व न्यायाधीश काटजू ने सोशल मीडिया पर टिप्पणी करते हुए कहा कि विधानसभा चुनाव हारने के बाद ममता बनर्जी अब सुर्खियों में बने रहने के लिए अदालत का सहारा ले रही हैं। उन्होंने लिखा, “चूंकि ममता बनर्जी चुनाव हार गई हैं, इसलिए अब वह विधानसभा में जाकर आवाज नहीं उठा सकतीं। ऐसे में उन्होंने हाईकोर्ट को अपनी नई जगह बना लिया है, ताकि चर्चा में बनी रह सकें।”
दरअसल, गुरुवार को ममता बनर्जी वकीलों का काला कोट पहनकर Calcutta High Court पहुंचीं। उन्होंने चुनाव के बाद कथित हिंसा और पार्टी कार्यालयों पर हमलों को लेकर दायर जनहित याचिका की सुनवाई में हिस्सा लिया। अदालत में उन्होंने कहा कि “बंगाल कोई बुल्डोजर राज्य नहीं है।”
यह मामला मुख्य न्यायाधीश Sujoy Paul और जस्टिस Parthasarathi Sen की खंडपीठ के सामने सुनवाई के लिए आया। ममता के साथ Chandrima Bhattacharya और Kalyan Banerjee भी मौजूद थे।
टीएमसी की ओर से दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद पार्टी कार्यालयों पर हमले हुए और कार्यकर्ताओं के खिलाफ हिंसा की गई।
इस पूरे मामले के बीच बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने पश्चिम बंगाल बार काउंसिल से 48 घंटे के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। BCI यह जानना चाहता है कि ममता बनर्जी का वकालत पंजीकरण और पेशेवर स्थिति क्या है।
दरअसल, नियमों के मुताबिक किसी संवैधानिक पद पर रहते हुए सक्रिय वकालत की अनुमति नहीं होती। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि मुख्यमंत्री रहने के दौरान उनका बार लाइसेंस निलंबित था या नहीं, और यदि था तो क्या उसे दोबारा सक्रिय कराया गया।
BCI ने पश्चिम बंगाल बार काउंसिल से ममता बनर्जी की नामांकन तिथि, पंजीकरण संख्या और वकालत की वर्तमान स्थिति से जुड़ी पूरी जानकारी मांगी है। वहीं इस घटनाक्रम ने बंगाल की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है।
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