
उज्जैन। शहर के बीचों-बीच स्थित शहीद राजा भाऊ महाकाल बस स्टैंड (देवासगेट) दिनों दिन बदहाल होता जा रहा है। यहां बने महिला यात्री प्रतिक्षालय में पुरुष सोए रहते हैं और मजबूरी में महिलाओं को बाहर बैठना पड़ रहा है। वहां भी श्वानों के झुंड आसपास लगे रहते हैं। परिसर तथा यहां बने सुविधाघरों में भी साफ-सफाई नहीं रहती और गंदगी आसपास बहती नजर आ रही है।
उल्लखनीय है कि देवास गेट बस स्टैंड पिछले करीब 20 वर्षों से उपेक्षा का शिकार बना हुआ है। इसके कायाकल्प के लिए पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल से लेकर सिंहस्थ और स्मार्ट सिटी जैसी बड़ी योजनाएं बनाई गईं, लेकिन ये सभी योजनाएं कागजों तक ही सीमित रह गईं। हालात यह हैं कि आज यहां यात्रियों को पीने का पानी और साफ सुथरे सुविधाघर तक उपलब्ध नहीं है, जिससे व्यवस्थाओं की पोल खुल रही है। देवासगेट बस स्टैंड की बदहाली का दौर तब से शुरू हुआ, जब रोडवेज बसों का संचालन बंद हुआ। इसके बाद से लगातार विकास के दावे तो किए गए, लेकिन धरातल पर कोई ठोस काम नजर नहीं आया। नगर निगम को हैंडओवर होने के बाद स्थिति और बिगड़ती चली गई। सिंहस्थ 2004 के पहले इस क्षेत्र को पीपीपी मॉडल पर विकसित करने की योजना को मंजूरी मिली थी, लेकिन जिम्मेदारों की उदासीनता के चलते यह फाइलों में ही दब गई। इसके बाद सिंहस्थ 2016 के दौरान भी बस स्टैंड को आधुनिक रूप देने के दावे किए गए, परंतु ये भी खोखले साबित हुए। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में शामिल होने के बाद एक बार फिर उम्मीद जगी थी कि देवासगेट बस स्टैंड को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। कोरोना काल से पहले तक इस दिशा में कागजी कवायद चलती रही, लेकिन बाद में यह योजना भी ठंडे बस्ते में चली गई। धार्मिक नगरी उज्जैन में हर साल लाखों श्रद्धालु आते हैं, लेकिन शहर के प्रमुख बस स्टैंड की यह स्थिति प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है। जबकि यहां नगर निगम की पर्याप्त जमीन उपलब्ध है, जिससे व्यावसायिक और यात्री सुविधाओं का बेहतर विकास किया जा सकता है। वर्तमान में बस स्टैंड का भवन जर्जर हो गया है। महिलाओं के बैठने और विश्राम करने के स्थान का अभाव है। मजबूरी में यात्री परिसर में नीचे बैठते हैं और वहां भी श्वान और मवेशी आसपास घूमते रहते हैं।
जनभागीदारी भी नहीं ला सकी बदलाव..
देवासगेट बस स्टैंड को जनभागीदारी मॉडल पर विकसित करने की योजना भी बनाई गई थी। इसमें नया भवन, व्यवस्थित बस संचालन और यात्रियों के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का खाका तैयार किया गया था। यहां तक कि निगम की दुकानों को हटाकर आधुनिक मार्केट बनाने की योजना को मंजूरी भी मिल गई थी, लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी और प्रशासनिक उदासीनता के कारण यह योजना भी आगे नहीं बढ़ सकी।
संभावनाओं के बावजूद ठहरा विकास…
देवासगेट बस स्टैंड के आसपास पर्याप्त जमीन और व्यावसायिक संभावनाएं मौजूद हैं। यदि सही योजना और इच्छाशक्ति के साथ काम किया जाए तो यह क्षेत्र रोजगार के नए अवसर पैदा कर सकता है और शहर को नई पहचान दिला सकता है। बावजूद इसके, वर्षों से यह स्थान बदहाली का शिकार बना हुआ है।
योजनाएं बनीं, लेकिन अमल नहीं हुआ….
यह है बस स्टैंड पर यात्रियों की परेशानियां
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