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मालदा कांड में बड़ा खुलासा, अधिकारियों को बंधक बनाने वाला मास्टरमाइंड वकील गिरफ्तार

April 03, 2026

मालदा: पश्चिम बंगाल के मालदा में न्यायिक अधिकारियों को घेरकर बंधक बनाने के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर चल रही जांच के बीच सीआईडी ने इस घटना के कथित मास्टरमाइंड वकील मोफक्करुल इस्लाम को गिरफ्तार कर लिया है. बताया जा रहा है कि वह भागने की कोशिश कर रहा था, तभी उसे एयरपोर्ट से पकड़ा गया.

सूत्रों के अनुसार, मोफक्करुल इस्लाम को बागडोगरा हवाई अड्डे से उस वक्त गिरफ्तार किया गया, जब वह वहां से फरार होने की कोशिश कर रहा था. नॉर्थ बंगाल के एडीजी जयरामन ने बताया, “हमने लोगों को भड़काने के आरोप में मोफक्करुल इस्लाम को हिरासत में लिया है. हम इस तरह की घटनाओं को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेंगे.” उन्होंने कहा कि यह भी जांच की जाएगी कि घटना पहले से प्लान थी या नहीं.

एडीजी जयरामन के मुताबिक, इस पूरे मामले में अब तक 35 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. घटना के बाद सभी न्यायिक अधिकारियों को केंद्रीय अर्धसैनिक बल (CAPF) की सुरक्षा दे दी गई है, ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो.


  • इससे पहले चुनाव आयोग ने मालदा जिले में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान न्यायिक अधिकारियों के घेराव की घटना की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंप दी थी. यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर लिया गया है. आयोग के सूत्रों के अनुसार, NIA की टीम शुक्रवार तक पश्चिम बंगाल पहुंच सकती है. चुनाव आयोग ने साफ कहा है कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान किसी भी तरह की हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

    उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में चुनाव आयोग के सचिव सुजीत कुमार मिश्रा ने NIA के महानिदेशक को पत्र लिखकर इस मामले की जांच करने को कहा है. पत्र में सुप्रीम कोर्ट के उस निर्देश का जिक्र किया गया है, जिसमें जांच केंद्रीय एजेंसी CBI या NIA से कराने की बात कही गई थी.

    उच्चतम न्यायालय ने इस पूरे मामले में स्वतः संज्ञान लिया है. जानकारी के मुताबिक, मालदा जिले के एक बीडीओ मुख्यालय पर बुधवार दोपहर करीब 3:30 बजे सात न्यायिक अधिकारियों का घेराव किया गया था. ये अधिकारी मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) के तहत दावे और आपत्तियों की सुनवाई के लिए तैनात थे. पश्चिम बंगाल में यह प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर ही न्यायिक अधिकारियों को सौंपी गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने इस घटना को गंभीर मानते हुए अवमानना का मामला बताया है. अब इस मामले में अगली सुनवाई 6 अप्रैल को होगी, जिस पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं.

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