
इंदौर। मध्यप्रदेश से खाड़ी देशों तक पहुंचने वाले फ्रोजन पराठे, डिहाइड्रेटेड सब्जियां और मसाले इन दिनों युद्ध के चलते बिगड़े हालात की भेंट चढ़ गए हैं। शहर और प्रदेश से होने वाला निर्यात बीते एक महीने में 60 से 70 फीसदी तक प्रभावित हुआ है। कमर्शियल गैस की किल्लत ने जहां मसालों के काम को प्रभावित किया है, वहीं कई अन्य कामों में लगने वाली मशीनें अन्य गैसों की कमी से संचालित नहीं हो रही हैं।
खाड़ी देश पूरी दुनिया में सप्लाई के लिए एक मुख्य सेंटर प्वाइंट का काम करते हैं, लेकिन बिगड़े हालात ने बीते एक महीने में प्रदेश के खाद्य निर्यात (फूड एक्सपोर्ट) को खासा प्रभावित किया है। हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं, लेकिन पूरी तरह अभी भी सबकुछ ठीक नहीं हुआ है, जिसका सीधा असर ये हुआ है कि जहां पहले हजारों किलोमीटर की यात्रा कर ये उत्पाद खाड़ी देशों या यहां से अन्य जगह के सुपर मार्केट तक नियमित रूप से पहुंचते थे, अब वही सप्लाई चेन लगभग ठप हो गई है। इन क्षेत्रों का कारोबार लगभग 60 से 70 फीसदी तक प्रभावित हो गया है। निर्यातकों के अनुसार युद्ध के चलते लॉजिस्टिक्स संकट ने इन कुछ खास उत्पादों के व्यापार को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है। हमें कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। नए ऑर्डर मिलने में काफी परेशानियां हो रही हैं। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश ने पिछले कुछ वर्षों में प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात (प्रोसेस्ड फूड) के क्षेत्र में मजबूत पहचान बनाई है। यहां से ईरान, सऊदी अरब, यूएई, कतर, कुवैत, बहरीन और ओमान जैसे देशों में तैयार खाद्य सामग्री, अनाज, दालें, फ्रोजन सब्जियां और फल निर्यात किए जाते हैं, लेकिन वर्तमान हालात ने इसे चुनौती में बदल दिया है। शिपिंग रूट प्रभावित होने से माल ढुलाई और बीमा लागत में भी तेज बढ़ोतरी हुई है। इससे निर्यातकों के लाभ मार्जिन पर सीधा असर पड़ा है।
मसालों से लेकर सब्जियां तक होती हैं निर्यात
प्रदेश और शहर के आसपास इंडस्ट्री से तैयार खाद्य सामग्री मसलन फ्रोजन पराठे, फ्रोजन सब्जियां, फल और अन्य जल्दी खराब होने वाले उत्पाद बड़ी मात्रा में खाड़ी देशों को निर्यात किए जाते हैं। ये सप्लाई चेन पूरी तरह प्रभावित हुई है, क्योंकि इन्हें तय समय पर तय स्थान पर पहुंचना होता है, जबकि मौजूदा स्थिति में ये लंबा समय ले रहा है और इस देरी के कारण इन उत्पादों का निर्यात जोखिमभरा हो गया है और राज्य के निर्यातकों को इस कारण लंबे समय तक आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है।
हर तरह से बढ़ी लागत
वहीं एक अन्य उद्योगपति यशराज गायकवाड़ ने बताया कि वे फूड डिहाइड्रेशन के कारोबार से जुड़े हैं, जिसमें वे वेजिटेबल और फ्रू ट डिहाइड्रेट एवं वैक्यूम कर एक्सपोर्टर के साथ ही प्रीमियर ब्रांड को सप्लाय करते हैं। बिजनेस कैश फ्लो के साथ होता है और तनाव के चलते अब ये बहुत प्रभावित हुआ है। हर तरह से बढ़ी लागत के कारण अब ये महंगा पड़ रहा है। मशीनों में लगने वाली गैसों के साथ ही कमर्शियल गैस उपलब्ध नहीं है। फिलहाल मार्केट केवल फस्र्ट नीड उत्पादों के लिए ही प्राथमिक रह गया है।
री-डिस्ट्रीब्यूशन का प्रमुख केंद्र ही प्रभावित
इंडस्ट्रियल सप्लायर कृष्णा मांडोवरा ने बताया कि दुबई, जो पहले री-डिस्ट्रीब्यूशन का प्रमुख केंद्र था, अब खुद प्रभावित है। ऐसे में हमारे कारोबार में करीब 70 फीसदी तक गिरावट आ चुकी है। वहीं कमर्शियल गैस की अनुपलब्धता ने तैयार होने वाले माल को भी प्रभावित किया है। हम सही समय पर कुछ भी तैयार नहीं कर पा रहे हैं। कई जगह फिलहाल ये काम पूरी तरह ठप पड़ा हुआ है।
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