काठमांडू। नेपाल (Nepal) की सियासत में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। नए प्रधानमंत्री बालेन शाह (Balendra Shah) ने सत्ता संभालते ही सुधारों की तेज रफ्तार शुरू कर दी है। इसी बीच उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के न्योते को स्वीकार कर लिया है, जिससे दोनों देशों के रिश्तों में नई ऊर्जा आने के संकेत मिल रहे हैं।
भारत दौरा क्यों अहम?
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने पुष्टि की है कि भारत यात्रा की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। पीएम बनने के बाद यह बालेन शाह की पहली बड़ी कूटनीतिक पहल होगी।
भारत, नेपाल का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और दोनों देशों के बीच खुली सीमा, ऊर्जा, कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे जैसे कई अहम क्षेत्र जुड़े हैं। ऐसे में यह दौरा रिश्तों को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
100 सूत्रीय प्लान से सख्त संदेश
प्रधानमंत्री बनने के साथ ही बालेन शाह ने 100-पॉइंट एक्शन प्लान लागू कर दिया है। इससे साफ है कि उनकी सरकार तेज बदलाव के मूड में है।
वीआईपी कल्चर पर सख्ती
सरकारी कामकाज में देरी खत्म करने का लक्ष्य
गरीबों के लिए मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं
महिलाओं के लिए सुरक्षित सार्वजनिक परिवहन
बच्चों के लिए तनावमुक्त शिक्षा व्यवस्था
छात्र राजनीति पर बड़ा फैसला
सरकार ने स्कूलों और विश्वविद्यालयों में छात्र राजनीति पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। 90 दिनों के भीतर सभी राजनीतिक छात्र संगठनों को खत्म करने का निर्देश दिया गया है।
हालांकि इस फैसले पर विवाद भी है—समर्थक इसे शिक्षा सुधार मान रहे हैं, जबकि आलोचक इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर असर बताकर विरोध कर रहे हैं।
प्रशासन और शिक्षा में भी बदलाव
नई नीति के तहत सरकारी कर्मचारी और शिक्षक किसी भी राजनीतिक दल से जुड़े नहीं रह सकेंगे। साथ ही, सरकारी संस्थानों में सक्रिय यूनियनों को खत्म करने की तैयारी है।
शिक्षा क्षेत्र में भी बड़े बदलाव प्रस्तावित हैं
स्नातक में प्रवेश के लिए नागरिकता अनिवार्यता खत्म करने का प्रस्ताव
सख्त अकादमिक कैलेंडर
पांचवीं तक पारंपरिक परीक्षा प्रणाली में बदलाव
सख्त कार्रवाई से बढ़ी हलचल
सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली समेत कुछ नेताओं पर कार्रवाई कर राजनीतिक माहौल और गरमा दिया है।
युवाओं के एजेंडे पर फोकस
जनआंदोलनों में मारे गए छात्रों के परिवारों को सरकारी नौकरी देने का फैसला भी लिया गया है। यह कदम युवाओं को साधने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
35 वर्षीय बालेन शाह ने शुरुआत से ही साफ कर दिया है कि वे पारंपरिक राजनीति से अलग रास्ता अपनाने वाले हैं। अब नजर इस बात पर है कि उनके सख्त फैसले और भारत के साथ बढ़ती नजदीकियां नेपाल की राजनीति और अर्थव्यवस्था को किस दिशा में ले जाती हैं।
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