
नई दिल्ली: केंद्रीय सड़क परिवहन (Central Road Transport) और राजमार्ग मंत्री (Highways Minister) नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने देश की ऊर्जा नीति (Energy Policy) और वैकल्पिक ईंधन (Alternative Fuel) के भविष्य को लेकर एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि भारत को जल्द से जल्द 100 प्रतिशत एथनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य अपनाना चाहिए, जिससे देश ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सके और आयातित पेट्रोलियम पर निर्भरता कम हो। गडकरी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है और ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) एक प्रमुख चिंता का विषय बन चुकी है।
एथनॉल एक जैव ईंधन है जो गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। इसे पेट्रोल के साथ मिलाकर फ्लेक्स फ्यूल के रूप में उपयोग किया जाता है। फ्लेक्स फ्यूल वाहनों को इस प्रकार डिजाइन किया जाता है कि वे विभिन्न अनुपात में मिश्रित ईंधन पर आसानी से चल सकें। कई देशों में, विशेषकर ब्राजील में, एथनॉल ब्लेंडिंग का उच्च स्तर पहले से लागू है और यह ऊर्जा मॉडल का एक सफल उदाहरण माना जाता है।
गडकरी ने एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के रूप में आयात करता है, जिससे देश पर आर्थिक बोझ बढ़ता है। उन्होंने बताया कि हर वर्ष लाखों करोड़ रुपये का विदेशी मुद्रा केवल जीवाश्म ईंधन के आयात पर खर्च किया जाता है, जिसका सीधा प्रभाव अर्थव्यवस्था और पर्यावरण दोनों पर पड़ता है। ऐसे में वैकल्पिक और स्वदेशी ईंधन स्रोतों को बढ़ावा देना बेहद आवश्यक है।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि वर्ष 2023 में देश में 20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रित पेट्रोल की शुरुआत की गई थी और वर्तमान में अधिकांश वाहन मामूली तकनीकी बदलाव के साथ इस ईंधन पर चल सकते हैं। उनका मानना है कि इस दिशा में आगे बढ़ते हुए 100 प्रतिशत एथनॉल ब्लेंडिंग एक दीर्घकालिक समाधान हो सकता है, जिससे न केवल ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी बल्कि प्रदूषण में भी कमी आएगी।
गडकरी ने ऑटोमोबाइल उद्योग से भी अपील की कि वे केवल लागत पर ध्यान न देकर गुणवत्ता और नवाचार पर अधिक जोर दें, ताकि भारतीय उद्योग वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सके। उन्होंने यह भी कहा कि पारंपरिक पेट्रोल और डीजल वाहनों के उपयोग को धीरे धीरे कम करने की दिशा में नीतिगत प्रयास आवश्यक हैं, हालांकि उपभोक्ताओं पर किसी प्रकार का दबाव नहीं डाला जाना चाहिए।
ग्रीन हाइड्रोजन को लेकर भी उन्होंने अपने विचार साझा किए और इसे भविष्य का प्रमुख ईंधन बताया। उन्होंने कहा कि यदि हाइड्रोजन उत्पादन और वितरण की लागत को कम किया जा सके, तो यह ऊर्जा क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है। इसके लिए तकनीकी विकास और बुनियादी ढांचे में बड़े निवेश की आवश्यकता होगी।
उनके अनुसार, भारत में नवीकरणीय ऊर्जा और जैव ईंधन के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं, जिन्हें सही नीतियों और निवेश के माध्यम से उपयोग में लाया जा सकता है। इससे देश न केवल ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बन सकता है बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक प्रमुख निर्यातक के रूप में भी उभर सकता है।
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