
इंदौर। कल वैशाख शुक्ल चतुर्दशी (Shukla Chaturdashi) को भगवान नृसिंह प्रकट उत्सव शहर में आस्था, श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। प्राचीन नृसिंह मंदिर से सुबह प्रभातफेरी और शाम को पारंपरिक शोभायात्रा धूमधाम से निकाली जाएगी। इसके लिए जोरदार तैयारियां की गई है। 250 साल पुराने देवताओं के विभिन्न मुखौटे सभी के आकर्षक का केंद्र रहेंगे।
कल भगवान विष्णु के चौथे अवतार भगवान नृसिंह का प्रकट उत्सव है। इसी दिन भगवान विष्णु ने अपने उग्र रूप में नृसिंह अवतार लेकर भक्त प्रह्लाद की रक्षा की थी और हिरण्यकश्यपु का वध किया था। प्राचीन नृसिंह मंदिर में भगवान नृसिंह के प्राकट्य महोत्सव की शुरुआत हुई। भगवान लक्ष्मी नृसिंह का सुबह रजत कलश से अभिषेक किया गया। पुजारी छोटेलाल शर्मा ने बताया नित्य शृृंगार आरती के बाद अभिजीत मुहूर्त में उत्सव कलश की घटस्थापना की गई।
सुगंधित पुष्पों से शृंगार किया गया। सायंकाल से यमुना सरोवर में कमल नौका में भगवान ने नौका विहार किया। मंदिर में आज दोपहर 3 बजे से महिला मंडल द्वारा भजन-कीर्तन किए जाएंगे व अन्य अनुष्ठान होंगे। 30 अप्रैल सुबह प्रभातफेरी तो शाम को भगवान का प्राकट्य उत्सव मनाया जाएगा व शोभायात्रा निकाली जाएगी। ज्योतिषाचार्य आचार्य पं रामचंद्र शर्मा वैदिक के अनुसार नृसिंह अवतार आधा मानव और आधा सिंह के रूप में प्रकट हुआ था, जिसने यह संदेश दिया कि जब-जब धरती पर अत्याचार और अधर्म बढ़ता है, तब-तब भगवान किसी न किसी रूप में अवतरित होकर धर्म की रक्षा करते हैं। इस वर्ष यह पर्व गुरुवार को पडऩे से इसका धार्मिक महत्व और भी बढ़ गया है। गुरुवार और नृसिंह प्रकट उत्सव के योग में गुरु ग्रह की भी विशेष पूजा करनी चाहिए। ऐसा करने से कुंडली के गुरु ग्रह से जुड़े दोष भी शांत हो सकते हैं।
मंदिर में है 250 साल पुराने विभिन्न देवताओं के मुखौटे
प्राचीन नृसिंह मंदिर में होलकर काल के समय के भगवान नृसिंह का स्वर्ण परत वाले मुखौटे के साथ ही महाराजा हिरण्यकश्यप, ब्रह्मा, विष्णु, महेश, गणेश, हनुमान, गरूड़, सुग्रीव व होलिका के मुखौटे भी हैं। इन्हें साल में सिर्फ नृसिंह जयंती पर ही बाहर निकाला जाता है। यह सभी करीब ढाई सौ साल पुराने हैं। इनका निर्माण लुगदी, मिट्टी, इमली के बीज (चिया) व सरेस से किया गया था। वर्तमान में अब फाइबर के मुखौटे भी तैयार कर लिए गए हैं, क्योंकि ये धारण करने में भी हल्के होते हैं। यह मुखौटे भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र रहते हैं।
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