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इंदौर में कैसे घटा दी सड़क की चौड़ाई

May 07, 2026

  • निगम ने चंदन नगर से नंदन नगर होते हुए नगीन नगर तक की सड़क को 60 फीट चौड़ा कराने की कवायद की, अभी प्रथम चरण का तर्क, यानी दूसरे चरण में फिर टूटेंगे मकान-दुकान
  • धारा २३ में उपांतरण प्रक्रिया पश्चात ही मास्टर प्लान रोड की चौड़ाई घटाई या बढ़ाई जा सकती है
  • बिना गजट नोटिफिकेशन के अलाइनमेंट भी नहीं बदल सकते

इंदौर। अभी नगर निगम के जनप्रतिनिधियों द्वारा मनमाने तरीके से मास्टर प्लान की सड़कों की चौड़ाई घटाने का निर्णय ले लिया, जबकि कानूनी हकीकत यह है कि मध्यप्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम 1973 की धारा 23 की उपधारा के प्रावधानों के तहत ही उपांतरण की प्रक्रिया अनिवार्य है और उसके बाद ही मास्टर प्लान रोड की चौड़ाई घटाई या बढ़ाई जा सकती है। अभी कुछ दिनों पूर्व ही नगर निगम ने इसी धारा 23 का इस्तेमाल करवाते हुए शासन से चंदन नगर से नंदन नगर होते हुए नगीन नगर की सड़क को 60 फीट चौड़ा करवाया और उस आधार पर 350 बाधक मकानों को तोड़ने का निर्णय भी लिया और महापौर ने मास्टर प्लान में इस 42वीं सड़क को शामिल करने को गेम चेंजर भी बताया। अब वही महापौर सड़कों की चौड़ाई घटाने पर सहमत हो गए और उनका तर्क है कि पहले चरण में कम चौड़ाई की सड़क बनेगी यानी दूसरे चरण में फिर भविष्य में फिर मकानों-दुकानों को तोड़ना पड़ेगा।


  • नगर निगम ने केन्द्र सरकार से प्राप्त 468 करोड़ की राशि से इंदौर मास्टर प्लान की 23 सड़कों के निर्माण का ना सिर्फ निर्णय लिया, बल्कि चार पैकेजों में उसके टेंडर भी मंजूर कर दिए। यानी टेंडर में 100 फीट चौड़ी सड़क का निर्माण बताया और अब मौके पर 80 फीट पर सहमति बताई जाने लगी। क्षेत्रीय विधायक और रहवासियों के साथ-साथ महापौर पुष्यमित्र भार्गव भी इसके लिए तैयार हो गए। नतीजतन आधा दर्जन से अधिक सड़कों की चौड़ाई घटाने का निर्णय निगम ने अपने स्तर पर ही ले लिया, जिसके लिए शासन से कोई लिखित अनुमति नहीं मिली और चूंकि शासन के पास भी अधिकार नहीं हैं और उपांतरण प्रक्रिया के बाद ही चौड़ाई घटाई या बढ़ाई जा सकती है। अभी महापौर श्री भार्गव चौड़ाई घटाने पर यह तर्क दे रहे हैं कि पहले चरण में कम चौड़ाई में सड़कें बनेंगी। यानी ना तो अलाइनमेंट बदलेगा और ना चौड़ाई घटेगी। इसका मतलब यह हुआ कि कुछ वर्ष बाद जब दूसरे चरण में सड़कों को फिर चौड़ा करने की प्रक्रिया शुरू होगी तब अभी जो मकान-दुकान कम चौड़ाई के चलते तोड़े जा रहे हैं उन्हें फिर से तोडऩा पड़ेगा, क्योंकि रहवासियों पर तलवार तो लटकी ही रहेगी। जब तक कि मास्टर प्लान में ही धारा 23 के तहत उपांतरण की प्रक्रिया ना करवाई जाए। सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि जब निगम ने इन 23 सड़कों के टेंडर निर्धारित चौड़ाई के मुताबिक ही मंजूर किए तो अब कम चौड़ाई में निर्माण करवाकर बड़ा घोटाला भी किया जा रहा है।

    हालांकि निगम के आला अधिकारियों से लेकर भोपाल के भी वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि किसी भी सड़क की चौड़ाई घटाई या बढ़ाई नहीं जा सकती। उसके अधिकार किसी जनप्रतिनिधि को हैं भी नहीं। उल्लेखनीय है कि अभी आधा दर्जन से अधिक सड़कों की चौड़ाई घटाते हुए कुछ जगह रहवासियों ने स्वेच्छा से अपने मकान तोडऩा भी शुरू कर दिए हैं, जिसमें जिंसी चौराहा से लक्ष्मीबाई प्रतिमा की सड़क 80 की बजाय 60 फीट करने, छावनी सड़क भी 80 से 60 फीट के अलावा कंडिलपुरा, जिंसी चौराहा से लक्ष्मीबाई प्रतिमा, सुभाष मार्ग से रामबाग के बाद अब अन्य सड़कों पर भी इसी तरह की मांग आने लगी है। दरअसल, नगर निगम सड़क चौड़ीकरण में बाधक निर्माणों को तोडऩे के एवज में मुआवजा राशि तो देता नहीं है, उसके बदले में टीडीआर सर्टिफिकेट दिए गए हैं। हालांकि उसका भी उपयोग नहीं हो पा रहा है, क्योंकि शासन ने आवश्यक मास्टर प्लान में संशोधन अभी तक नहीं किए हैं। नगर निगम द्वारा सड़कों की चौड़ाई घटाने के मामले को अब हाईकोर्ट में भी चुनौती दी जा रही है और लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू में भी इसकी जांच होगी।

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