
इंदौर। पिछले दिनों इंदौर हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के 17 पेजी आदेश में बताया गया कि इंदौर का मास्टर प्लान 31 मार्च 2021 को ही समाप्त हो गया है, जिसके चलते अभी नगर निगम द्वारा सड़क चौड़ाई को लेकर जो नोटिस तोड़फोड़ के जारी किए उसके आधार पर हाईकोर्ट में ही ढेर सारी याचिकाएं दायर हो गईं, जिसमें यह तर्क दिया गया कि जब हाईकोर्ट ने ही मास्टर प्लान को समाप्त बता दिया तो फिर किस आधार पर सड़कों की चौड़ाई निर्धारित की जा रही है, इसमें चंदन नगर, कालानी नगर सड़क विशेष रूप से शामिल की गई। नगर तथा ग्राम निवेश ने शासन आदेश प्राप्त कर इस हाईकोर्ट आदेश को डबल बेंच में चुनौती भी दे दी है, जिसकी पुष्टि संयुक्त संचालक सुशोभन बनर्जी ने की है।
अग्निबाण ने ही पिछले दिनों हाईकोर्ट के इस आदेश का खुलासा किया था। दरअसल, इंदौर का मास्टर प्लान 1 जनवरी 2008 से लागू हुआ, जो कि 2021 तक के लिए बनाया गया। हालांकि नियमों के मुताबिक जब तक नया मास्टर प्लान नहीं आ जाता तब तक पुराना प्लान ही लागू रहता है। इंदौर का मास्टर प्लान पहले भी सालों तक इसी तरह चलता रहा। मगर हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने पिछले दिनों एक ऐसा आदेश जारी कर दिया, जिससे नगर तथा ग्राम निवेश भी भौंचक रह गया। इसमें कहा गया कि इंदौर का मास्टर प्लान 31 मार्च 2021 को ही समाप्त हो गया है।
दरअसल, यह आदेश मास्टर प्लान में बस स्टैंड के लिए आरक्षित की गई लसूड़ियामोरी की एक जमीन के संबंध में जारी किया, जिसमें मास्टर प्लान को समाप्त बताते हुए 60 दिनों में उक्त जमीन पर व्यावसायिक निर्माण की अनुमति देने के अभिन्यास को मंजूर करने की भी बात कही गई। चूंकि मास्टर प्लान निरंतर जारी रहता है और हाईकोर्ट आदेश की अपील करना जरूरी था, जिसके चलते नगर तथा ग्राम निवेश संचालक ने अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखा, उसके बाद विधि विभाग में फाइल पहुंची और वहां से मिली अनुमति के बाद अभी डबल बैंच में इस आदेश के खिलाफ अपील प्रस्तुत कर दी गई है। सड़कों की चौड़ाई के साथ-साथ हाईकोर्ट आदेश के चलते 31 मार्च 2021 के बाद मंजूर किए गए सारे अभिन्यासों पर भी संकट आ जाता। लिहाजा सिंगल बेंच के 17 पेजी आदेश को चुनौती देना ही पड़ी।
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