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इंदौर: कैंसर मरीजों को नई उम्मीद, आयुर्वेद अस्पताल में शुरू हुई ओजोन थैरेपी

May 10, 2026

इंदौर के हॉस्पिटल में देशभर से पहुंच रहे मरीज, 8 माह में 400 से ज्यादा को मिला लाभ
इन्दौर। शासकीय अष्टांग आयुर्वेद हॉस्पिटल (Government Ashtang Ayurveda Hospital) में कैंसर (Cancer) जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों (Patients) के लिए अब राहत की नई उम्मीद दिखाई देने लगी है। आयुर्वेद आधारित इलाज के साथ यहां शुरू की गई ओजोन थैरेपी से मरीजों को फायदा मिलने का दावा किया जा रहा है। अस्पताल के शल्य तंत्र विभाग में अगस्त 2025 से शुरू हुई इस थैरेपी का लाभ अब तक 400 से ज्यादा मरीज ले चुके हैं।

कैंसर का नाम सुनते ही मरीज और उसका परिवार मानसिक, शारीरिक और आर्थिक तनाव में घिर जाता है। ऐसे में सरकारी स्तर पर बिना बड़े दुष्प्रभाव वाले वैकल्पिक उपचारों पर भी जोर दिया जा रहा है। कैंसर के गंभीर दर्द से राहत दिलाने के लिए यह थैरेपी कारगर साबित हो रही है । अस्पताल की आयुर्वेद कैंसर यूनिट में हर साल देशभर से करीब 1000 मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।



  • ऑक्सीजन बढ़ाकर शरीर मजबूत करने का दावाशल्य तंत्र विभागाध्यक्ष एवं आयुर्वेद कैंसर यूनिट संचालक डॉ अखलेश भार्गव के मुताबिक ओजोन थैरेपी शरीर में ऑक्सीजन की उपलब्धता बढ़ाने का कार्य करती है। उनका कहना है कि ऑक्सीजन की कमी कई बीमारियों को बढ़ाती है, जबकि ओजोन थैरेपी शरीर की कोशिकाओं को सक्रिय कर रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करने में मदद करती है। अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार अगस्त 2025 से अप्रैल 2026 तक अगस्त में 41, सितंबर में 102, अक्टूबर में 46, नवंबर में 24, दिसंबर में 19, जनवरी में 38, फरवरी में 37, मार्च में 17 और अप्रैल में 29 मरीजों को यह थैरेपी दी गई।

    इंजेक्शन और अन्य तकनीकों से दी जाती है थैरेपी
    डॉक्टरों के अनुसार ओजोन ऑक्सीजन का सक्रिय रूप है, जिसे मशीन के जरिए शरीर में पहुंचाया जाता है। यह थैरेपी विभिन्न तरीकों से दी जाती है, जिसमें इंजेक्शन, घाव के आसपास उपयोग और कुछ मामलों में अन्य चिकित्सीय प्रक्रियाएं शामिल हैं। अस्पताल में सप्ताह में दो दिन डॉ आकाश बिसोने सेवाएं दे रहे हैं।

    जोड़ों के दर्द से लेकर कैंसर तक उपयोग का दावा
    अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि ओजोन थैरेपी का उपयोग कैंसर के अलावा घुटनों के दर्द, कमर दर्द, त्वचा रोग और घाव भरने जैसी समस्याओं में भी किया जा रहा है। यूनिट में डॉ श्वेता वर्मा, डॉ शेखर पटेल सहित अन्य पैरामेडिकल स्टाफ सेवाएं दे रहा है। अस्पताल के चिकित्सकों का कहना है कि यूरोपीय देशों में यह तकनीक पहले से उपयोग में है और इस विषय पर कई रिसर्च पेपर भी प्रकाशित हो चुके हैं। आयुर्वेद और आधुनिक तकनीक के मेल से कैंसर मरीजों को राहत देने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

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