
जबलपुर। शहर की सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की एक शाखा में लोन स्वीकृति प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। पूर्व बैंक मैनेजर और जैन बंधुओं की कथित मिलीभगत से बड़े स्तर पर वित्तीय अनियमितताओं का मामला अब चर्चा का विषय बन गया है। आरोप है कि पूरे मामले की जानकारी बैंक के उच्च अधिकारियों तक पहुंचने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। पीडि़ता भावना दीक्षित पति रामकिशोर दीक्षित ने इस मामले को लेकर जबलपुर शाखा, क्षेत्रीय कार्यालय और भोपाल आंचलिक कार्यालय तक शिकायतें की हैं। उनका आरोप है कि लगातार शिकायतों के बावजूद आज तक उन्हें न्याय नहीं मिला और उनकी शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई।
सार्वजनिक धन के दुरुपयोग के आरोप
पीडि़ता की शिकायत के अनुसार पूर्व बैंक मैनेजर ने कथित तौर पर निजी लाभ के उद्देश्य से जैन बंधुओं के साथ मिलकर सार्वजनिक धन का दुरुपयोग किया और लगातार ऋण स्वीकृत किए। आरोप है कि पावन फोम्स नामक पार्टनरशिप फर्म को ऋण दिया गया, जिसमें दो महिला पार्टनर शामिल हैं।शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि मामले में करीब 2 करोड़ रुपये के सिविल वर्क और 3 करोड़ रुपये की मशीनरी का रिकॉर्ड संदिग्ध स्थिति में है, जिससे वित्तीय अनियमितताओं की आशंका और गहरी हो गई है।
मुख्य सतर्कता आयुक्त से भी लगाई गुहार
पीडि़ता ने भोपाल आंचलिक कार्यालय को पत्र लिखकर अपनी जमीन से जुड़े भुगतान और सार्वजनिक धन की सुरक्षा की मांग की थी। साथ ही मुख्य सतर्कता आयुक्त से भी हस्तक्षेप की अपील की गई थी। मामले में अब यह सवाल उठ रहे हैं कि शिकायतों के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हो रही। पीडि़ता का कहना है कि अब उन्हें लगने लगा है कि उनकी शिकायत फाइलों में दबकर रह गई है और उस पर धूल जमने लगी है। फिलहाल बैंक की ओर से मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि आरोपों की निष्पक्ष जांच होती है, तो कई अहम खुलासे सामने आ सकते हैं।
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