
जबलपुर। थायराइड की गांठों (नोड्यूल्स) से पीडि़त मरीजों, विशेषकर महिलाओं के लिए अब बिना चीरा, बिना बेहोशी और बिना किसी निशान के आधुनिक तकनीक से इलाज संभव हो सकेगा। थायराइड एब्लेशन जैसी अत्याधुनिक तकनीक को देशभर में सुरक्षित और प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए पहली बार राष्ट्रीय स्तर की गाइडलाइन तैयार की गई है, जिसका नेतृत्व जबलपुर के प्रसिद्ध थायराइड सर्जन डॉ. संजय कुमार यादव ने किया है।
देश में पहली बार बनी… नेशनल गाइडलाइन
जानकारी के अनुसार, देश में अब तक थायराइड एब्लेशन तकनीक को लेकर कोई राष्ट्रीय दिशा-निर्देश मौजूद नहीं थे। ऐसे में इंडियन एसोसिएशन ऑफ एन्डोक्राइन सर्जन्स ने भारत की पहली नेशनल गाइडलाइन तैयार करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी डॉ. संजय कुमार यादव को सौंपी। यह गाइडलाइन अब देश के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सर्जिकल जर्नल में प्रकाशन के लिए स्वीकार कर ली गई है। चिकित्सा जगत में इसे बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
बिना ऑपरेशन और बिना… निशान का इलाज
डॉ. यादव ने बताया कि थायराइड एब्लेशन एक आधुनिक और मिनिमली इनवेसिव तकनीक है, जिसमें मरीज को बड़ा चीरा नहीं देना पड़ता और न ही सामान्य बेहोशी की आवश्यकता होती है। इस प्रक्रिया में शरीर पर किसी प्रकार का स्थायी निशान भी नहीं बनता। यही वजह है कि यह तकनीक विशेष रूप से महिलाओं के लिए काफी लाभकारी मानी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तकनीक से मरीज जल्दी स्वस्थ होता है और उसे लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहने की जरूरत भी नहीं पड़ती।
जबलपुर से तैयार होंगे देशभर के इलाज के मानक
डॉ. संजय यादव ने कहा कि यह केवल एक चिकित्सा दस्तावेज नहीं, बल्कि जबलपुर के लिए गौरव का विषय है। जबलपुर में तैयार किए गए ये दिशा-निर्देश अब पूरे देश में थायराइड मरीजों के इलाज और डॉक्टरों की ट्रेनिंग का आधार बनेंगे। उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया है कि आधुनिक चिकित्सा नवाचार और थायराइड केयर के क्षेत्र में जबलपुर देश के अग्रणी शहरों में शामिल हो चुका है।
9 जून को होगा लाइव लॉन्च कार्यक्रम
इस ऐतिहासिक उपलब्धि के उपलक्ष्य में नेशनल सर्जन्स वीक के दौरान आगामी 9 जून को रात 8 बजे लाइव ज़ूम लॉन्च कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम में देशभर के सर्जन, मेडिकल विशेषज्ञ और चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोग शामिल होंगे। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि यह गाइडलाइन आने वाले समय में थायराइड उपचार की दिशा बदलने में अहम भूमिका निभाएगी और मरीजों को अधिक सुरक्षित, आधुनिक और प्रभावी इलाज उपलब्ध कराने में मददगार साबित होगी।
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