
नई दिल्ली(New Delhi)। भारत (India)में फ्री एड-सपोर्टेड स्ट्रीमिंग टीवी (FAST) और OTT प्लेटफॉर्म्स पर चल रहे लाइव टीवी चैनलों ( regarding live TV channels)को लेकर बड़ा विवाद (A major dispute)खड़ा हो गया है। केबल और DTH ऑपरेटर्स का कहना है कि Tata Play, Airtel Digital TV(Tata Play, Airtel Digital TV,) और अन्य पारंपरिक सेवाओं के ग्राहक तेजी से कम हो रहे हैं क्योंकि वही टीवी चैनल(same TV channels) और कंटेंट अब इंटरनेट पर फ्री(free on the internet) में उपलब्ध हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक दिसंबर 2022 में जहां DTH ग्राहकों की संख्या 6.66 करोड़ थी, वहीं दिसंबर 2025 तक यह घटकर लगभग 5.09 करोड़ रह गई। कंपनियों का आरोप है कि OTT प्लेटफॉर्म्स बिना भारी लाइसेंस फीस के वही कंटेंट दे रहे हैं, जो केबल और DTH पर भुगतान के साथ मिलता है। इसी वजह से वे मांग कर रहे हैं कि इंटरनेट टीवी प्लेटफॉर्म्स पर भी करीब 10 करोड़ रुपये तक की लाइसेंसिंग फीस और समान नियम लागू किए जाएं।
वहीं दूसरी तरफ OTT और डिजिटल कंपनियों का तर्क है कि यह प्लेटफॉर्म टीवी ब्रॉडकास्ट नहीं बल्कि इंटरनेट आधारित सेवाएं हैं। Jio Platforms, JioStar और अन्य डिजिटल इकाइयों का कहना है कि पुराने केबल नियमों को इंटरनेट युग पर लागू करना गलत होगा। उनके अनुसार FAST चैनल्स टीवी नहीं बल्कि ऐप-आधारित स्ट्रीमिंग हैं, जिन्हें अलग कानूनी ढांचे में देखा जाना चाहिए।
इसी विवाद में अब टीवी निर्माता कंपनियां भी शामिल हो गई हैं। उनका कहना है कि वे सिर्फ स्मार्ट टीवी में ऐप्स उपलब्ध कराते हैं, कंटेंट की जिम्मेदारी उनकी नहीं है। भारत में करोड़ों लोग कनेक्टेड टीवी और मोबाइल पर फ्री लाइव चैनल देखते हैं, ऐसे में अगर TRAI केबल कंपनियों के पक्ष में फैसला देता है, तो कई फ्री OTT लाइव टीवी चैनल और स्पोर्ट्स स्ट्रीमिंग सेवाओं पर असर पड़ सकता है या उन्हें पेड मॉडल में बदलना पड़ सकता है। अब सबकी नजर TRAI के अंतिम फैसले पर टिकी है, जो भारत में डिजिटल टीवी और पारंपरिक ब्रॉडकास्टिंग के भविष्य की दिशा तय कर सकता है।
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