
संयुक्त राष्ट्र । यूएन में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश (P. Harish India’s Permanent Representative to the UN) ने कहा कि पाकिस्तान ने रमजान माह में अफगान नागरिकों का कत्लेआम किया (Pakistan massacred Afghan Civilians during the month of Ramadan) ।
भारत ने पाकिस्तान की दोहरी नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह एक तरफ अंतरराष्ट्रीय कानून की बात करता है, जबकि दूसरी तरफ अफगानिस्तान में आम नागरिकों को बेरहमी से मारता है। यह हमले इस्लाम के पवित्र महीने रमजान के दौरान किए गए और उन लोगों को निशाना बनाया गया जो शाम की नमाज के बाद मस्जिद से बाहर निकल रहे थे। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी हरीश ने सुरक्षा परिषद में कहा कि अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (यूएनएएमए) ने बताया है कि 2026 के पहले तीन महीनों में पाकिस्तान की सेना की ओर से की गई सीमा पार सैन्य कार्रवाई में 750 आम नागरिक मारे गए या घायल हुए। इनमें ज्यादातर घटनाएं हवाई हमलों की वजह से हुईं। चीन की अध्यक्षता में आयोजित “सशस्त्र संघर्ष में नागरिकों की सुरक्षा” विषय पर खुली बहस में हिस्सा लेते हुए हरीश ने पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि आसिम इफ्तिखार अहमद के भारत विरोधी बयान का जवाब दिया। पाकिस्तान ने इस दौरान कश्मीर का मुद्दा उठाया था।
हरीश ने कहा, “दुनिया पाकिस्तान के प्रचार को अच्छी तरह समझती है। उसमें न भरोसा है, न कानून का सम्मान और न ही नैतिकता।” उन्होंने कहा कि यह विडंबना है कि पाकिस्तान, जिसका इतिहास नरसंहार जैसे अपराधों से भरा हुआ है, भारत के पूरी तरह आंतरिक मामलों पर टिप्पणी कर रहा है। यह बेहद पाखंड है कि एक तरफ अंतरराष्ट्रीय कानून की बड़ी-बड़ी बातें की जाएं और दूसरी तरफ अंधेरे में मासूम नागरिकों को निशाना बनाया जाए।
भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने यूएनएएमए की दस मई को जारी रिपोर्ट ‘अफगानिस्तान में सीमा पार नागरिक हताहत’ का हवाला देते हुए अफगानिस्तान के एक नशा मुक्ति केंद्र पर हुए हमले का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस साल मार्च में रमजान के पवित्र महीने के दौरान जब लोग शांति, आत्मचिंतन और दया के माहौल में थे, पाकिस्तान ने काबुल के ओमिद एडिक्शन ट्रीटमेंट अस्पताल पर बेहद क्रूर हवाई हमला किया।” उन्होंने बताया, “यूएनएएमए के मुताबिक, इस शर्मनाक और अमानवीय हमले में 269 नागरिकों की मौत हुई और 122 लोग घायल हुए। यह एक ऐसा अस्पताल था जिसे किसी भी तरह सैन्य ठिकाना नहीं कहा जा सकता।”
यूएनएएमए की रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के हवाई हमले उस समय हुए जब तरावीह की नमाज खत्म हुई थी और कई मरीज मस्जिद से बाहर निकल रहे थे। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की सीमा पार हिंसा के कारण 94,000 से ज्यादा लोग अफगानिस्तान में शरणार्थी बनने पर मजबूर हुए। हरीश ने कहा कि पाकिस्तान की ऐसी हिंसक हरकतें कोई नई बात नहीं हैं। यह वही देश है जिसने अपने ही लोगों पर बम गिराए और व्यवस्थित तरीके से नरसंहार किए। उन्होंने 1971 में बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान हुए अत्याचारों का जिक्र करते हुए कहा कि ऑपरेशन सर्चलाइट के दौरान पाकिस्तान ने अपने ही नागरिकों के खिलाफ संगठित नरसंहार और चार लाख महिलाओं के साथ सामूहिक बलात्कार जैसी भयावह घटनाओं को अंजाम दिया था।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved