जयपुर। भारतीय रेलवे (Indian Railways) दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्क में शामिल है। देशभर में आधुनिक रेलवे स्टेशन, डिजिटल टिकटिंग (Digital Ticketing) और हाईटेक सुविधाएं तेजी से बढ़ रही हैं, लेकिन राजस्थान में एक ऐसा रेलवे स्टेशन भी रहा है जिसने अपनी अनोखी व्यवस्था से लोगों को हैरान कर दिया। यहां वर्षों तक न टिकट खिड़की थी और न ही प्लेटफॉर्म। यात्रियों को टिकट देने के लिए एक कर्मचारी बैग में टिकट लेकर स्टेशन पहुंचता था।
राजस्थान के बाड़मेर जिले में भारत-पाकिस्तान सीमा के पास स्थित लीलमा और जैसिंधर रेलवे स्टेशन आजकल सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बने हुए हैं। सीमावर्ती और कम आबादी वाले इलाके में स्थित इन स्टेशनों पर लंबे समय तक बुनियादी सुविधाओं का अभाव रहा।
आमतौर पर किसी भी रेलवे स्टेशन पर प्लेटफॉर्म सबसे जरूरी सुविधा माना जाता है, लेकिन इन स्टेशनों पर सालों तक प्लेटफॉर्म नहीं बना। ट्रेनें सीधे पटरियों के किनारे रुकती थीं और यात्रियों को जमीन से ही ट्रेन में चढ़ना पड़ता था।
इस वजह से बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को काफी परेशानी होती थी। भारी सामान लेकर ट्रेन में चढ़ना जोखिम भरा माना जाता था और हादसे की आशंका भी बनी रहती थी।
इन स्टेशनों की सबसे अलग बात यहां की टिकट व्यवस्था थी। यहां कोई टिकट काउंटर या बुकिंग ऑफिस नहीं था। ट्रेन आने से कुछ मिनट पहले एक ठेकेदार या रेलवे कर्मचारी बैग में टिकट लेकर स्टेशन पहुंचता था और यात्रियों को वहीं टिकट बेचता था।
डिजिटल दौर में यह व्यवस्था लोगों को बेहद अनोखी लग रही है। सोशल मीडिया पर जैसे ही इसकी जानकारी सामने आई, कई लोग हैरान रह गए कि देश में ऐसा रेलवे स्टेशन भी मौजूद रहा है।
रेलवे प्रशासन अब इन स्टेशनों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने की दिशा में काम कर रहा है। जानकारी के मुताबिक यहां करीब 600 मीटर लंबे प्लेटफॉर्म बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा बिजली, सुरक्षा और यात्री सुविधाओं का भी विस्तार किया जा रहा है।
उत्तर-पश्चिम रेलवे का उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बेहतर यात्रा सुविधाएं उपलब्ध कराना है। प्लेटफॉर्म बनने के बाद यात्रियों को ट्रेन में चढ़ने और उतरने में काफी राहत मिलेगी।
इस अनोखे स्टेशन की कहानी वायरल होने के बाद लोग इसे भारतीय रेलवे के सबसे अलग स्टेशनों में गिनने लगे हैं। कई लोगों ने इसे सीमावर्ती इलाकों में विकास की धीमी रफ्तार का उदाहरण बताया, तो कुछ ने इसे पुराने दौर की व्यवस्था का दिलचस्प हिस्सा कहा।
राजस्थान के ये स्टेशन आज भी उस समय की कहानी बयां करते हैं, जब दूरदराज और सीमा से जुड़े इलाकों तक सुविधाएं पहुंचाना आसान नहीं था। हालांकि अब यहां बदलाव की शुरुआत हो चुकी है और आने वाले समय में ये स्टेशन भी आधुनिक रेलवे नेटवर्क का हिस्सा बनते नजर आएंगे।
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