
अग्निबाण के स्वर्ण जयंती वर्ष प्रवेश पर शहरभर ने दी शुभकामनाएं…
इन्दौर। स्वर्ण जयंती (Golden Jubilee) वर्ष में प्रवेश करते अग्निबाण (agniban) को शुभकामनाएं देने के लिए कल शहरभर (Indore) के विशिष्टजनों का कारवां जुटा। बातें तब से लेकर अब तक की हुईं… अग्निबाण के संस्थापक स्व. श्री नरेशचंद्र चेलावत (Late Shri Nareshchandra Chelawat) के चित्र पर माल्यार्पण करने के बाद शुरू हुए कार्यक्रम में सभी ने संस्थापक के संघर्ष और सपने को याद किया। जब इंदौर शहर में कोई शाम के अखबार की कल्पना नहीं करता था, तब एक ऐसी सोच को जन्म देकर अग्निबाण की शुरुआत करने वाले संस्थापक ने उन दिनों में पूरे शहर को शाम के अखबार की जरूरत का न सिर्फ एहसास कराया, बल्कि उनके परिश्रम से रोपा हुआ पौधा आज वटवृक्ष बनकर पूरे देश में नाम रोशन कर रहा है। अग्निबाण के इस कार्यक्रम में मौजूद प्रदेश सरकार के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय तुलसी सिलावट, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, विधायक रमेश मेंदोला, मालिनी गौड़, मधु वर्मा सहित पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय, सुदर्शन गुप्ता, सत्यनारायण पटेल के साथ ही शहर के तमाम विशिष्टजनों सहित जिला भाजपा अध्यक्ष श्रवणसिंह चावड़ा, शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने अपने विचारों में अग्निबाण को कागज पर आग परोसने वाला और सकारात्मक पत्रकारिता का प्रहरी बताया।


अखबार शहर का आईना है…युवा अवस्था से मैं अग्निबाण का पाठक रहा: महापौर पुष्यमित्र भार्गव
आज हम सभी 50 वें वर्ष में प्रवेश कर इन्दौर की ताकत बनने वाले अग्निबाण को शुभकामनाएं प्रेषित करने के लिए एकत्र हुए है। अग्निबाण की बात करूं तो स्कूल से आने के बाद मुझे अग्निबाण का ही इंतजार रहता था। क्योंकि स्कूल के खेल की खबरें उस समय इसी पृष्ठ पर आती थी, जिसमें मैं अपना नाम ढूंढता था। कॉलेज समय में होने वाले प्रदर्शन और आन्दोलनों की खबरों के लिए भी केंटीन में इसी अखबार को ढूंढा जाता था। महाधिवक्ता बनने पर भी मेरी लगातार पत्रकार राजेश ज्वेलजी से शहरहित में चर्चाएं होती थी। कई तरह से शहरहित के कानूनी मुद्दों पर जिस तरह से अग्निबाण में कवरेज आता है, वह अपने आप में सहज के रखने लायक है। इस शहर को लेकर कई सारे निर्णय हाईकोर्ट से हुए वह अग्निबाण का संकलन है, जो किसी के पास नहीं होगा। अब में जब शहर के प्रथम सेवक का दायित्व निभा रहा हूं तो शहर में कौन से काम करने है वह भी मुझे अखबार से ही मिलते है। मेरा ऐसा मानना है कि अखबार शहर का आईना है और उस आईने को शतप्रतिशत अच्छे आईने के रूप में प्रस्तुत करने का काम राजेश भाई ने किया है।

पैनी संपादकीय से हर कोई भयग्रस्त हो जाता है- मंत्री तुलसीराम सिलावट

एक अखबार जिसने 5 दशक पूर्ण किए हो यह अपने आप में एक बड़ा कीर्तिमान है। यह कीर्तिमान ऐसे ही नहीं बनता है इसके लिए विश्वास अर्जित करना पड़ता है जो अग्निबाण ने प्रदेश के ह्रदय स्थल इन्दौर में हासिल किया है। जिस प्रकार से राजेश भाई संपादकीय लिखते है, कभी-कभी हम भी आश्चर्य चकित हो जाते है, हमे भी भय और डर लगता है कि इतनी पैनी कलम आपकी जो चलती है वह सिर्फ और सिर्फ विश्वास के कारण ही हो सकती है। यह संपादकीय इन्दौर के विकास प्रगति और उन्नति की कलम है। विज्ञान और टेक्नोलॉजी के युग में एक अखबार 50 वर्ष पूर्ण करें यह गर्व की बात है। अग्निबाण नेे साहस और निर्भिकता से हमेशा इन्दौर की विकास की बात की है। प्रदेश के विकास की बात हो या देश में कोई भी घटना घटी हो उसे आपके बीच भेजने का काम किया है। अग्निबाण ने अपनी लेखनी से, संकल्प से, विचारों से, चिंतन से जो शहर में पहचान बनाई है वह हमे हर पल गर्व का एहसास कराती है।

कोई पैसा लगाता है…कोई परिश्रम…अग्निबाण में बाबूजी ने प्राण लगाए
तिनका-तिनका जोडक़र कुनबा बनाया जाता है। उसी तरह से जितने लोग यहां मौजूद है उन सभी के स्नेह को जोडक़र अग्निबाण बना है और इसी बनाने के लिए कोई मेहनत नहीं करनी पड़ी, जो आपने जो विश्वास दिया, जो स्नेह दिया जो अपनापन दिया। अग्निबाण एक सपना था, हमारे प्राण पुरूष पिताश्री स्वर्गीय श्री नरेशचन्द्र चेलावत जी का। उनके जेहन सपना था कि शाम का भी एक अखबार होना चाहिए, लेकिन उस समय शाम का अखबार क्या होता है लोग समझते नहीं थे। इस बात को समझाने के लिए जब हम लोगों के बीच जाते थे तो वह यहीं कहते थे कि शाम का अखबार क्या होता है, अखबार तो सुबह का होता है।इस विश्वास को बनाने के लिए बड़ा लम्बा समय लग गया और इस लम्बे समय में हमें बड़े कठीन परीश्रण की आवश्यकता पड़ी। लोगों को जोडऩा, लोगों को समझाना, लोगों को समझना, लोगों ने समझा-परखा और आगे बड़ा। 23 मई 1977 को जब अखबार की शुरूआत हुई तब 300-400 प्रतियां हुआ करती थी। शहर भी बड़ा सीमित था और उस सीमित अस्वथा में अखबार की वितरण की जिम्मेदारी हमने खुद उठाई। उस समय ट्रेडल मशीन पर चार बार में अखबार तैयार होता था उस कठिन दौर से निकल कर अग्निबाण ने एक मुकाम पाया। आज शहर के साथ ही चार संस्करणों के साथ अग्निबाण बिना किसी दुविधा के साथ पुरे प्रदेश में अगर बरकार है तो उसके पीछे एक बहुत बड़ी तपस्या रही है लोग कहते है कि अखबार या किसी व्यवसाय में पैसा लगाया जाता है परिश्रम लगाया जाता है। लेकिन में आज गर्व से कहता हूं कि इस अग्निबाण में हमारे बाबूजी ने प्राण लगाए हैं। बाबूजी ने जिस परिश्रम के साथ पौधे को रोपा और आज वटवृक्ष बन कर इस शहर में निर्भिकता के साथ, निडरता के साथ सम्मान हांसिल कर रहा है।

माता-पिता की सेवा करने वाला कभी पीछे मुडक़र नहीं देखता
मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि किसी भी व्यापार या अखबार को बुलंदियों तक पहुंचाने के लिए माता-पिता का आशीर्वाद बहुत जरूरी होता है। मैं समझता हूं कि अखबार आज जहां भी खड़ा है उसमें राजेश भाई के पिता आदरणीय नरेशचन्द्रजी और माता पदमावती चेलावत का आशीर्वाद हर पल हर क्षण उन पर बना हुआ है। मेरा ऐसा मानना है कि जो लोग माता-पिता को याद रखते है वह उनके साथ हमेशा चलते है। राजेश भाई की जो शक्ति है, साहस है और माता-पिता के प्रति जो श्रृद्धा है उससे प्रतीत होता है कि आज वह सशरीर भले ही आपके साथ नहीं है मगर हर पल आपके साथ ही है।

इन्होंने भी रखे विचार
महेंद्र बापना के बिना बहुत कुछ अधूरा
अग्निबाण ने जिस निष्पक्षता, निडरता के साथ अग्निबाण की बुनियाद रखी है, वह अनुकरणीय है। अग्निबाण में स्व. महेन्द्र बापना जी को याद नहीं किया जाए तो कुछ अधुरा सा लगेगा हम सब उनको श्रृद्धा सुमन अर्पित करते है।
चिन्टू चौकसे
अग्निबाण ने अपना 50 वर्ष का सफर तय किया और अपनी बात को शहर में बहुत की पारदर्शीता के साथ रखा है।
मालिनी गौड़ विधायक
राजेश जी की खरी-खरी जिसे मुझ सहित शहर के कई लोग ढूंढ कर पढ़ते है। अग्निबाण की कागज की आग बरकरार रहे।
प्रवीण कक्कड़
शाम के अखबार को दुनिया में प्रथम स्थान बनाए रखना अपने आप में एक गर्व की बात है। अग्निबाण ने यह स्थान अपनी निष्पक्षता, निडरता और विश्वसनीयता से पाया है।
सुदर्शन गुप्ता
अन्य मीडिया संस्थान जहां टीआरपी के पीछे दौड़ते है वहीं अग्निबाण अपनी खबरों की विश्वसनीयता की चिन्ता करता है तभी को वर्षो से नम्बर वन बना हुआ है।
आकाश विजयवर्गीय


©2026 Agnibaan , All Rights Reserved