
पोस्टमार्टम रूम… जहां मुर्दे खुद अपनी मौत का राज खोलते हैं…
5 साल में डाक्टर्स ने 13,394 बॉडी का पोस्टमार्टम किया
इंदौर, प्रदीप मिश्रा ।
पोस्टमाटर्म रूम (post-mortem room)… जहां मुर्दे खुद बोलते हैं कि उन्हें किसी ने या फिर खुद ने खुद को कैसे मारा…कुल मिलाकर किसी भी हास्पिटल (Hospital) का पीएम हाउस (PM House) वह जगह है, जहां मुर्दे और डेडबॉडी खुद ही चीखकर बताते हैं कि आखिर उनकी मौत का राज क्या है…बशर्ते डाक्टर्स को डेडबॉडी की भाषा समझ में आना चाहिए…
पिछले साल 2025 में इंदौर के एमवायएच पीएम रूम में जहां 2 हजार 868 डेडबॉडी का पोस्टमार्टम, मतलब शव विच्छेदन किया गया, वहीं पिछले 5 सालों में 13 हजार से ज्यादा शवों का पीएम किया गया। एमजीएम मेडिकल कॉलेज के फोरेंसिक मेडिसिन विभाग के अनुसार पिछले 5 सालों में पोस्टमार्टम की संख्या लगभग 20 प्रतिशत बढ़ चुकी है, मगर शासन से मंजूर किए जा चुके खाली पदों में से कई पद आज तक खाली पड़े हैं। नतीजतन, डेडबॉडी की संख्या बढ़ जाने पर एसोसिएट्स और टीचिंग असिस्टेंट प्रोफेसर तक को शव विच्छेदन करना पड़ते हैं। इंदौर का एमवायएच मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा अस्पताल है। इसके पोस्टमार्टम हाउस में एक साथ 48 शव रखे जा सकते हैं, मगर संसाधन और सुविधाओं के मामले में राजधानी भोपाल के हमीदिया कॉलेज से भी पीछे है।
स्कूली बच्चों के पोस्टमार्टम करते वक्त सारा स्टाफ रो पड़ा था
इंदौर एमजीएम मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर और फोरेंसिक मेडिसिन विभाग के विभाग अध्यक्ष डाक्टर बजरंग ने बताया कि इंदौर के एमवायएच हास्पिटल के पोस्टमार्टम रूम में पोस्टमार्टम तो कई सालों से करते आ रहे हैं, मगर उनके जीवन में 3 बार ऐसा समय आया कि मन-मस्तिष्क और चेतना सहित भावनाओं को झंझनाकर रख दिया। एक बार तब, जब इंदौर में कई स्कूली बच्चों का पोस्टमार्टम करना पड़ा। पोस्टमार्टम के दौरान मासूम स्कूली बच्चों के शव देख खुद सहित स्टाफ बहुत भावुक हो गया था।
जब पेटलावद से पोटलियों में क्षत-विक्षत शव पीएम के लिए लाए थे
इसी तरह पेटलावद में खतरनाक विस्फोटक सामग्री बारूद में हुए भयंकर विस्फोट के दौरान तब, जब कई क्षत-विक्षत शव पोटलियो में रखकर पोस्टमार्टम के लिए इंदौर एमवायएच हास्पिटल लाए गए थे। तब उन शवों की हालत देख स्टाफ सन्न रह गया था। इसी तरह इंदौर में हुए बावड़ी हादसे के शव देखकर स्टाफ रो पड़ा था। इस दौरान भी सामूहिक पोस्टमार्टम करना पड़े थे।
सबसे ज्यादा पोस्टमार्टम कोरोना काल के दौरान करना पड़े
पीएम स्टाफ ने बताया कि आजादी के बाद सबसे ज्यादा पोस्टमार्टम कोविड-19 काल, मतलब कोरोना काल में करना पड़े। पोस्टमार्टम रूम की मच्र्यूरी में जहां 48 शव रखने की क्षमता थी, मगर पुराने कक्षों को खोलकर एक दिन में 64 शवों को रखवाया गया। इस दौरान दिनभर लगातार पोस्टमार्टम करना पड़े थे।
एमवाय में 5 सालों में 13 हजार 394 डेडबॉडी के पोस्टमार्टम हुए
साल डेडबॉडी
2021 2379
2022 2608
2023 2777
2024 2762
2025 2868
कुल – 13,394
डेडबॉडी के पोस्टमार्टम हुए
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