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66 श्मशान, कब्रिस्तानों में एक समान रहेंगी दरें, कचरा ट्रांसफर स्टेशन मेन्टेनेंस का ठेका निरस्त, बाण्ड लाने के साथ बैंक लोन भी लेगा निगम

June 19, 2026

इंदौर। कल महापौर परिषद की बैठक में शामिल अधिकांश प्रस्ताव जहां मंजूर किए गए, वहीं रेट झोन परिवर्तन जैसे विवादित प्रस्ताव रोके गए तो कचरा ट्रांसफर स्टेशन मेन्टनेंस के ठेके को भी निरस्त करने का निर्णय लिया गया। शहर में स्थित 66 श्मशान और कब्रस्तानों में अंतिम संस्कार के दौरान इस्तेमाल होने वाली सामग्रियों की दरें भी एक समान रखी जाएंगी, खासकर श्मशानों में जो लकड़ी, कंडे या अन्य सामग्री लगती हैं, उसकी दरें अलग-अलग वसूल की जाती हैं। इनके लिए समितियों के गठन का भी निर्णय है, वहीं नर्मदा के चौथे चरण के लिए निगम जो 1530 करोड़ रुपए का बैंक लोन लेने जा रहा था, उसमें अब 1 हजार करोड़ के बाण्ड लाने और शेष 530 करोड़ रुपए की राशि बैंक लोन के जरिए लेने पर भी चर्चा हुई है।

अग्निबाण ने अभी रेट झोन सहित अन्य विसंगतियों का मामला उठाया था, वहीं परिषद की बैठक, जो दोपहर 3 बजे बाद शुरू हुई, उसमें जहां निगम इंजीनियरों के हुए तबादले और उनको रिन्यू करने में की गई देरी पर जनकार्य समिति प्रभारी राजेंद्र राठौर ने सवाल उठाए और कहा कि हाईकोर्ट से यह इंजीनियर इसके चलते स्टे ले आए, वहीं राठौर कचरा ट्रांसफर स्टेशन मेन्टनेंस के ठेके में होने वाली गड़बड़ी का मुद्दा भी उठाया और कहा कि जो 10 स्टेशनों के रखरखाव का ठेका अवि इंटरप्राइजेस को दिया गया है, फिलहाल महापौर परिषद ने इस टेंडर को निरस्त करने का निर्णय लिया, वहीं एमआईसी के सदस्य अश्विन शुक्ल ने श्मशान और कब्रिस्तान के रखरखाव से जुड़े प्रस्ताव की जानकारी दी, जिसमें कई श्मशानों में यह शिकायत आती है कि अधिक दर लकडी, कंडे या अन्य सामग्री वसूल की जाती है। शुक्ल के मुताबिक 66 श्मशान और कब्रिस्तानों की एसओपी तैयार की गई है और अब एक समान ही रेट के साथ इनका संचालन समितियों के माध्यम से करवया जाएगा। शहर के कई प्रमुख श्मशानों को सामाजिक, धार्मिक और व्यापारिक संस्थाओं ने ले रखा है और उनका बेहतर संचालन भी कर रही है। वहीं अन्य बचे श्मशानों के संचालन, रखरखाव के लिए भी इसी तरह की समितियां बनाई जाएंगी। रात में सडक़ की सफाई करने वाली स्विपिंग मशीन के टेंडर को भी निरस्त किया गया। महापौर परिषद की बैठक मेंं महापौर पुष्यमित्र भार्गव, निगमायुक्त क्षितिज सिंघल सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे, वहीं परिषद के सदस्य मनीष शर्मा (मामा) ने यह मुद्दा भी उठाया कि निगम आयोजनों का जो प्रचार प्रसार होता है, उसके विज्ञापन, बैनर, पोस्टरों में विभागीय मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के फोटो गायब रहते हैं। उन्होंने इस पर आयुक्त से सफाई भी मांगी, जिस पर यह जवाब आया कि निगम द्वारा जो प्रचार-प्रसार सामग्री दी जाती है, उसमें तो मंत्री के फोटो रहते हैं, मगर शासन स्तर पर जो प्रचार सामग्री प्रकाशित होती है, उसमें गाइड लाइन के मुताबिक प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के ही फोटो रहते हैं।


  • हालांकि अफसरों ने कहा कि इसकी ड्राइंग, डिजाइन ऊपर यानी भोपाल से ही बनकर आती है, उस पर मनीष मामा ने पूछा कि महापौर और आयुक्त दोनों यहीं मौजूद हैं और वे इसका जवाब दें। हालांकि महापौर ने इस मामले को संभालते हुए देखने की बात भी कही। भवन अनुज्ञा के दौरान फायर टैक्स वसूलने के अलावा सरदार वल्लभभाई पटेल रोटरी का विकास, नई प्रतिमा स्थापित करने के अलावा कायाकल्प अभियान के तहत टिगरिया बादशाह मेनरोड से कुशवाह नगर होते हुए उज्जैन नाका बाणगंगा तक लिंक रोड के निर्माण को भी मंजूरी दी गई, जिस पर लगभग 19 करोड़ खर्च होना है।

    70 लाख का टेंडर 50 लाख का कैसे हो गया
    महापौर परिषद की बैठक में जो दो दर्जन प्रस्ताव मंजूरी के लिए रखे गए, उनमें कुछ विवादित प्रस्तावों पर हल्ला भी मचा, जिनमें एक प्रस्ताव कचरा ट्रांसफर स्टेशन के मेन्टनेंस से भी जुड़ा था। पिछले कई वर्षों से शहरभर में मौजूद 10 स्टेशनों का रखरखाव ठेकेदार फर्म अवि इंटरप्राइजेस द्वारा किया जाता रहा और उसके एवज में 70 लाख रुपए हर महीने निगम से दिए जाते हैं। अभी जो नया टेंडर इस फर्म ने भरा, उसमें 70 के बजाए 50 लाख रुपए की राशि भरी गई। लिहाजा जनकार्य समिति प्रभारी राजेंद्र राठौर ने निगमायुक्त से पूछा कि ठेकेदार फर्म कितने सालों से 70 लाख रुपए महीना निगम से लेती रही और अब पेट्रोल, डीजल की कीमत बढऩे, मशीनों के पुराने होने के बावजूद 20 लाख रुपए कम में टेंडर कैसे ले रही है?

    सिनेमाघरों से भी कमाई की जुगाड़ में निगम
    नगर निगम अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने में जुटा है, जिसके चलते जनता पर हर तरह के टैक्स लादने के साथ-साथ अन्य उपाय भी आजमाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में शहर के सिनेमाघरों में बिना नगर निगम अनुमति के प्रदर्शित किए जा रहे विज्ञापनों को मप्र आउटडोर विज्ञापन मीडिया नियम 2017 के अंतर्गत पंजीयन करवाते हुए लायसेंस फीस की राशि का निर्धारण करने का निर्णय भी लिया गया। उल्लेखनीय है कि कई वर्ष पूर्व सिनेमाघरो को लायसेंस देने का जिम्मा भी निगम के पास था, जो बाद में मल्टीप्लेक्स पालिसी के चलते वाणिज्यिक कर विभाग के पास चला गया।

    रेट झोन बदलने का खेल हो गया चौपट
    बीते कई सालों से नगर निगम बड़ी होशियारी से रेट झोन बदलकर अधिक सम्पत्ति कर वसूल करता रहा है। बजट भाषण में तो महापौर किसी तरह की टैक्स वृद्धि का दावा नहीं करते और पर्दे के पीछे से सडक़ निर्माण या अन्य विकास कार्यों का हवाला देकर रेट झोन बदल दिया जाता है। शहर के 85 वार्डों में निगम रेट झोन के आधार पर सम्पत्ति कर वसूल किया जाता है, जिसमें रेट झोन 1 के अंतर्गत शहर के पाश और विकसित इलाके शामिल है, जहां सबसे अधिक सम्पत्ति की दर अधिक है, वहीं 60 कालोनियों का सम्पत्ति कर रेट झोन बदलकर बढ़ाया जाना था, जिस पर बवाल मचा और राजस्व समिति प्रभारी निरंजन चौहान गुड््डू ने फाइल लौटा दी और कल बैठक में भी महापौर सहित अन्य सदस्यों ने रेट झोन बदलने के प्रस्ताव को मंजूर करने से इनकार दिया, जिसके चलते यह प्रस्ताव अस्वीकार हो गया।

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