
इंदौर। प्रदेश सरकार (State Government) द्वारा उज्जैन-इंदौर (Ujjain-Indore) मेट्रोपॉलिटन एरिया (Metropolitan Area) को लेकर जारी की गई अधिसूचना (Notification ) को हाईकोर्ट (High Court) में चुनौती दी गई है। जस्टिस विजयकुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीजन बेंच में आज इस पर सुनवाई होना है।
इसे लेकर एडवोकेट अक्षत पहाडिय़ा द्वारा याचिका दायर कर इससे जुड़े अनेक कानूनी बिंदु उठाए गए हैं और कहा गया है कि इन बिंदुओं की अनदेखी कर ये अधिसूचना जारी की गई। अन्य बिंदुओं के साथ इसके नाम में इंदौर को उज्जैन के बाद रखे जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं। उल्लेखनीय है कि नगरीय विकास और आवास विभाग ने इस अधिसूचना में शामिल किए गए 16 हजार वर्ग किलोमीटर का एरिया निर्धारित किया है, जिसमें आधा दर्जन जिले शामिल हैं। इंदौर, देवास, उज्जैन, धार, शाजापुर और रतलाम की कुल 38 तहसीलें इसमें शामिल की गईं, जिनमें 2781 गांव जुड़े हैं। 75 लाख से अधिक की आबादी के मान से मेट्रोपॉलिटन की तैयारी की जा रही है और चार चरणों में इसे पूरा किया जाएगा। अंतिम रूप से 16000.87 स्क्वेयर किलोमीटर का एरिया लिया गया है और 75.34 लाख आबादी का अनुमान लगाया गया है। इसमें इंदौर का पूरा 100 फीसदी एरिया, जो कि 3901.63 वर्ग किलोमीटर होता है, उसे शामिल किया गया है, जबकि उज्जैन का 6097.99 वर्ग किलोमीटर में से 3595.24 वर्ग किलोमीटर का एरिया इसमें जोड़ा गया है, जो 59 प्रतिशत होता है।