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MP: धार के इमामबाड़ा केस में मुस्लिम पक्ष को बड़ी राहत… HC ने दिए चाबियां सौंपने के आदेश

June 26, 2026

इंदौर। एमपी (MP) के धार (Dhar) के विवादित सरकारी इमामबाड़ा (Controversial Government Imambara) मामले में हाई कोर्ट (High Court) से मुस्लिम पक्ष को बड़ी राहत मिली है। एमपी हाईकोर्ट (MP High Court) ने धार के विवादित सरकारी इमामबाड़े में मुहर्रम के दौरान ताजिया बनाने के लिए दायर याचिकाओं पर प्रशासन को आदेश दिया है कि इसकी चाबियां मुस्लिम समुदाय के याचिकाकर्ता को 24 घंटे के भीतर सौंप दी जाएं। एमपी हाई कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष और याचिकाकर्ता को 5 दिन के लिए इमामबाड़े के इस्तेमाल की अनुमति देते हुए कहा कि इससे राज्य सरकार के कानूनी हितों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

सरकारी इमामबाड़े की चाबियां सौंपने का आदेश
इंदौर पीठ के जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस जय कुमार पिल्लई ने याचिकाकर्ताओं को अंतरिम राहत प्रदान करते हुए कहा कि संबंधित प्राधिकारी या अनुविभागीय अधिकारी (एसडीओ) को निर्देश दिया जाता है कि वह याचिकाकर्ता सिद्दीक को धार के किले में स्थित सरकारी इमामबाड़े की चाबियां एक दिन के भीतर सौंप दें।


  • एक जुलाई को लौटानी होगी चाबियां
    अदालत ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता को भी निर्देश दिया जाता है कि ताजिया का कार्यक्रम पूरा होने के बाद वह एक जुलाई को दोपहर 12 बजे तक एसडीओ को इमामबाड़े की चाबियां लौटा दे।प्रशासन ने अगस्त 2025 में धार के हटवाड़ा स्थित सरकारी इमामबाड़े को लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को सौंप दिया था।

    याचिकार्ताओं ने खटखटाया था HC का दरवाजा
    अधिकारियों ने तब बताया था कि एक एसडीएम अदालत की ओर से इमामबाड़े को पीडब्ल्यूडी की संपत्ति घोषित किए जाने और ताजिया समिति की अपील संभाग आयुक्त स्तर पर खारिज होने के बाद यह कार्रवाई की गई। इसके बाद याचिकार्ताओं में शामिल सिद्दीक ने हाई कोर्ट एक रिट याचिका दायर करके कार्रवाई को चुनौती दी।

    याचिकाकर्ताओं की क्या दलील
    अदालत में पेश एक अन्य याचिका में अय्या अंसारी उर्फ जेबरान अंसारी और बाबू चाचा उर्फ जाकिर मोहम्मद ने सरकारी इमामबाड़े में हर साल मोहर्रम के दौरान 70 दिनों के लिए ताजिया निर्माण की अस्थायी अनुमति देने और पारंपरिक किराया स्वीकार करने का निर्देश देने की गुहार लगाई थी। याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने दावा किया कि धार के सरकारी इमामबाड़े में ताजिया बनाने की परंपरा आजादी से पहले से है।

    सरकार बोली- उपलब्ध कराए हैं वैकल्पिक स्थल
    हाईकोर्ट में बहस के दौरान राज्य सरकार ने याचिकाकर्ताओं की दलीलों का पुरजोर विरोध करते हुए कहा कि मुस्लिम समुदाय को ताजिया निर्माण के लिए छोटा इमामबाड़ा और जमातखाना जैसे वैकल्पिक स्थल के रूप में उपलब्ध कराए गए हैं। खंडपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलों पर गौर किया। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ताओं के वकील ने वचन दिया है कि इमामबाड़ा एक जुलाई को संबंधित प्राधिकारी को निश्चित रूप से सौंप दिया जाएगा। ऐसे अदालत याचिकाकर्ताओं की अंतरिम मांग की गुहार मंजूर करती है।

    इमामबाड़ा में कोई निर्माण कार्य नहीं होगा
    हालांकि अदालत ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं के कब्जे में रहने के दौरान इमामबाड़ा में किसी प्रकार का निर्माण कार्य नहीं किया जाएगा। इसको संपत्ति को साफ-सुथरी अवस्था में राज्य सरकार को लौटाया जाएगा। खंडपीठ ने इस पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग कराने का भी निर्देश दिया और मामले की अगली सुनवाई के लिए 22 जुलाई की तारीख तय की। बता दें कि इमामबाड़ा मुस्लिम समुदाय का सभा भवन होता है जिसका इस्तेमाल विशेष रूप से धार्मिक सभाओं के लिए किया जाता है।

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